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चाहिए 12 हजार करोड़, केंद्र ने दिए 2042 करोड़, कैसे बनेगी सड़क ?

7 वर्ष पहले
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ग्रामीणकार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि 12000 करोड़ की जगह मात्र 2042 करोड़ रुपए के आवंटन से राज्य में गांव की सड़कें (पीएमजीएसवाई) कैसे बनेंगी, यह केन्द्र को सोचना होगा। केंद्र द्वारा दिए गए 8982 करोड़ रुपए में से 8944 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। राज्य की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को पूरा करने के लिए और 10 हजार करोड़ रुपए की जरूरत हैं। यह राशि मिलने पर ही राज्य का विकास संभव है। वह सोमवार को चार राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में पीएमजीएसवाई की चल रही योजनाओं की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। कहा- 5000 किमी. ग्रामीण सड़क को पीएमजीएसवाई की स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजा जा रहा है। इसकी शीघ्र स्वीकृति मिलनी जरूरी है। योजना एवं प्रशासनिक व्यय मद में खर्च होने वाली राशि भी राज्य को दी जाए।

(इसके पहले सिर्फ केंद्रीय एजेंसियां ही गांव की सड़क बनाती थीं)

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पीएमजीएसवाई के अंतर्गत चार राज्य में कार्यान्वित योजनाओं की सघन समीक्षा के लिए दो दिवसीय क्षेत्रीय समीक्षा बैठक शुरू हुई। इसमें मुख्य रूप से कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, राज्य की कार्य संपादन क्षमता, पूर्ण पथों के अनुरक्षण कार्य सहित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। राज्यों में अपनाई गई बेहतर प्रक्रिया एवं नई तकनीकी को साझा किया गया। कार्यक्रम का उद्‌घाटन मंत्री श्रवण कुमार ने किया। स्वागत ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ तथा अध्यक्षता केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश भूषण ने किया। मौके पर मंत्रालय के निदेशक (ग्रामीण संपर्कता) वाईएस द्विवेदी, राष्ट्रीय ग्रामीण पथ विकास एजेंसी के निदेशक एनसी सोलंकी, डॉ. आईके पटेरिया, चमनलाल, एन वासवराजा, सुनील कुकरेजा, राकेश कुमार आदि भी मौजूद थे।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि केंद्र से आदिवासी खासकर पश्चिमी चंपारण के थारू बहुल इलाकों में सड़क निर्माण के लिए अलग से पैसे देने की मांग की गई है। इससे समाज के सबसे निचले तबके को मुख्यधारा में लाने में सफलता मिलेगी। जिस तरह नक्सलग्रस्त क्षेत्रों के लिए केंद्र अलग से राशि मुहैया करा रहा है, उसी तरह आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी राशि मिलनी ही चाहिए।

आंकड़ों में राज्य की पीएमजीएसवाई

{वर्ष 2001 में प्रारंभ

{  स्वीकृत: 19195करोड़