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जिऊतिया कल, माताएं आज करेंगी नहाय-खाय

7 वर्ष पहले
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संतानकी लंबी आयु के लिए किया जाने वाला जिऊतिया व्रत मंगलवार (16 सितंबर ) को है। व्रत रखने वाली माताएं सोमवार को नहाय-खाय करेंगी। इसे लेकर रविवार को देर शाम तक राजधानी के बाजारों में खासी रौनक रही। जिऊतिया गुथवाने से लेकर मडुआ का आटा, नोनी का साग, सतपुतिया झिंगनी, कंदा, कोहड़ा, मकई का बाल, खीरा समेत अन्य फलों की खरीदारी के लिए महिलाओं में होड़ दिखी।

कैसेकरें पूजा : पवित्रहोकर संकल्प के साथ व्रती प्रदोषकाल (शाम को) में गाय के गोबर से अपने आंगन लीपे या छत की ठीक से सफाई करें। किसी तरह से एक छोटा सा तालाब बना लें। तालाब के निकट पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर दें। शालिवाहन राजा के पुत्र जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति मिट्टी के बर्तन में स्थापित कर पीली और लाल रुई से सजाएं तथा धूप, दीप, चावल, फूल, माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों से पूजन करें। मिट्टी गाय की गोबर से चिल्हो (मादा चील) सियारिन की मूर्ति बनाकर उनके मस्तकों को लाल सिंदूर से सुशोभित करें। अपने वंश की वृद्धि और प्रगति के लिए बांस के पत्तों से पूजन करना चाहिए। इसके बाद व्रत की कथा सुनें। अपने पुत्र-पौत्रों की लंबी आयु एवं सुंदर स्वास्थ्य की कामना से महिलाओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिए।

सब्जी के भाव

माताएं खाती हैं नोनी का साग

नोनी का साग

160रुपए

सतपुतिया झिगनी

50-60रुपए

कंदा 32-36

कोहड़ा- 32-40

खीरा- 24-28

सेव- 90-120

*सभी रेट रुपए प्रतिकिलो में

नोनी के साग का जिऊतिया व्रत में खास महत्व है। नोनी का साग थोड़ा से जमीन पर लगा देने पर बहुत ज्यादा पसर जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी तरह से वंश वृद्धि होती है। इस पर्व में ऐसी चीजें खाई जाती हैं, जो ज्यादा फैलने वाली होती हैं। मड़ुआ का आटा भी फैलता है। इन चीजों का शास्त्रों में वर्णन नहीं है, लोकाचार के कारण इस्तेमाल होता है।

{ व्रत करने वाली महिलाओं को सरगही रात 12.54 बजे से पहले कर लेना होगा, क्योंकि 12.54 बजे तक ही सर्वार्थ सिद्धियोग है। { मंगलवार को पूरे दिन रात भर अमृत सिद्धियोग है। इसलिए इस बार जिऊतिया व्रत में किसी तरह की समस्या नहीं है। { वैसे महिलाएं शाम में पूजा करती हैं।



प्रात: 4.57 बजे के बाद होगा पारण