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मातृभाषा में शिक्षा से ही होगा हिंदी का विकास
प्रतियोगिता के विजेता होंगे पुरस्कृत
पटना| एएनकॉलेज में सोमवार को हिंदी दिवस की प्रासंगिकता पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। आयोजन सुबह 11 बजे से अनुग्रह साहित्य परिषद और बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। विजेताओं में दीपक जायसवाल, अमित मिश्रा और शिवनंदन प्रसाद शामिल हैं।
हिंदी जनभाषा और संघर्ष की भाषा है
पटना| हिंदीदिवस रविवार के दिन होने के कारण विभिन्न संस्थानों में होने वाले कार्यक्रम एक दिन पहले ही आयोजित हुए। लेकिन पटना कॉलेज में रविवार को भी एक व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें कवि आलोक धन्वा भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदी जनभाषा है। यह संघर्ष और आंदोलन की भाषा है। इसका स्थान कोई दूसरी भाषा नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि हिंदी का पक्ष लेना अंग्रेजी का विरोध करना नहीं है लेकिन जरूरी है कि हिंदी को उचित सम्मान मिले क्योंकि यह हमारी भाषा है। वहीं दयाशंकर राय ने कहा कि आज हिंदी की पहचान सिमटी है। बाहर में इसका प्रसार मजदूर वर्ग के ही लोग कर रहे हैं। पढ़े-लिखे लोग अंग्रेजीदां हो रहे हैं। वहीं पटना कॉलेज के प्राचार्य ने इस अवसर पर कहा कि हिंदी के विकास में पटना कॉलेज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर यहीं से पढ़े। प्रो. चौधरी ने हिंदी दिवस के अवसर पर पटना कॉलेज के छात्र रहे को आलोक धन्वा को प्रोफेसर बनाने की बात कही।
जन कल्याण परिषद की विकास यात्रा
बिहार जनकल्याण परिषद ने कंकड़बाग कॉलोनी मोड़ से दिनकर गोलंबर तक हिंदी विकास यात्रा का आयोजन किया। कार्यक्रम में परिषद के प्रवक्ता राकेश सिंह, सुमन कुमार मल्लिक, अजय कुमार, राकेश सिंह, जीतेंद्र पासवान, संजीव कुमार बब्बू, डॉ. दिनेश कुमार, अरविंद तिवारी, राजेश पाठक उपस्थित थे।
हिंदी दिवस समारोह
अंतरराष्ट्रीय हिंदी परिषद एवं जगदम्बी प्रसाद यादव स्मृति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हिंदी परिषद के महासचिव सह हिन्दी सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव, डॉ. अंशुमाल, प्रो. रामेश्वर प्रसाद, प्रियंबदा केसरी, प्रो. गिरिजा पांडे उपस्थित थे।
जनतंत्र की भाषा है हिंदी
सर गणेश दत्त विचार मंच ने हिंदी की वर्तमान स्थिति और भविष्य विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किय