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एनएच-30 के किनारे फेंकी लाखों की दवा

7 वर्ष पहले
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क्या कहता हैनियम

दवाघोटाले को लेकर गरमाई बिहार की सियासत के बीच सोमवार को एनएच-30 पर सड़क के किनारे लाखों रुपए की दवा मिलने से सनसनी फैल गई। गंदी जगह पर ये दवाएं रामकृष्णानगर थाना इलाके के पल्स हॉस्पिटल के सामने फेंकी मिली। फेंकी गई दवाओं में टैबलेट, कैप्सूल, एंटी बॉयोटिक के साथ जीवन रक्षक दवाएं हैं। इनमें अधिकतर एक्सपायर्ड दवाएं हैं, जो इसी वर्ष मार्च मई में एक्सपायर्ड कर गई हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर गई थी। पुलिस का मामला नहीं होने की वजह से उन लोगों ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।

जांचको लाए नमूना

बहरहालमामले के तूल पकड़ने के बाद ड्रग कंट्रोलर हेमंत कुमार ने ग्रामीण ड्रग इंस्पेक्टर श्रीधर को मौके पर भेजा। श्रीधर ने वहां पहुंचकर मामले की छानबीन की। साथ ही कुछ नमूने भी जांच को ले गए। फेंकी गई दवाएं ब्रांडेड कंपनी की नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि ये दवाएं इनोवेटिव कंपनी की हैं। अधिकतर दवाएं आेफ्लॉकसासिन ग्रुप की हैं। ड्रग कंट्रोलर हेमंत ने बताया कि रिपोर्ट अभी नहीं आई है। नमूने की जांच की जाएगी। दवा कंपनी से भी संपर्क किया जाएगा। पूरी जांच के बाद ही हकीकत का खुलासा होगा।

इन बिंदुओं पर हो सकती है जांच

1.जहां पर दवाएं मिली हैं, आसपास तीन दर्जन नर्सिंग होम हैं। हो सकता है कि दवा के एक्सपायर्ड करने के बाद नर्सिंग होम वालों ने इसे फेंक दिया हो।

2.टीम दवा दुकानों पर छापेमारी कर रही है। हो सकता है कि बचने के लिए दवा दुकानदार ने इसे फेंक दिया हो।

3.दवाओं को अपराधियों ने लूटा हो। कुछ बेच दी गई हों और बची दवाएं एक्सपायर्ड होने के बाद फेंक दिया हो।

4.बैच नंबर के आधार पर यह जानकारी लेगी कि आखिर इन दवाआें को किस इलाके में भेजा गया था।

5.दवा घोटाले को लेकर मामला गर्म होने के बाद हो सकता है कि किसी दवा माफिया की यह करतूत हो।

जानकारों का कहना है कि एक्सपायरी दवाओं को यों ही फेंका नहीं जा सकता है। इसे या तो जला दिया जाना चाहिए या फिर जमीन में गाड़कर डिस्ट्रॉय कर देना चाहिए। अगर इसे यूं ही फेंक दिया जाएगा, तो संभावना है कि इन दवाओं पर लिखे एक्सपायरी डेट को मिटाकर इसे मार्केट में सप्लाई कर दिया जाए। इससे लोगों को भारी नुकसान हो सकता है।

पल्स हॉस्पिटल के पास एक्पायर्ड दवाएं सड़क किनारे फेंकी मिलीं।