- Hindi News
- मांझी ने कटु सत्य कहा मगर सुधार के उपाय?
मांझी ने कटु सत्य कहा- मगर सुधार के उपाय?
बिहार में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में भारी गिरावट के बारे में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कटु सत्य कहे हैं। जो बात कोई अन्य नहीं कह सका, उसे कहने की हिम्मत मुख्यमंत्री ने दिखाई। अपने दिल का दर्द भी कहा। कुछ लोगों को यह सब सनसनीखेज भी लग सकता है। पर, आम लोग इस तथ्य को पहले से जानते रहे हैं।
सवाल यह है कि इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार रहे हैं? अब इस स्थिति को कैसे बदला जाए? दरअसल, इसे बदलने के लिए राज्य सरकार को ही ठोस पहल करनी होगी। पहल भी मामूली नहीं। सर्जरी करनी होगी। इस समस्या के मूल में जाना होगा। राज्य की पूरी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को ठीक करना होगा। क्या यह सब हो पाएगा? नहीं होगा तो पीढ़ियां बर्बाद होती रहेंगी। इसे ठीक करने के क्रम में वैसे अनेक प्रभावशाली लोग नाराज भी हो सकते हैं, जिन्होंने शिक्षा को पूरी तरह व्यवसाय बना लिया है। नाराज लोग इतने ताकतवर हैं कि वे अगले चुनाव को प्रभावित भी कर सकते हैं। पर, सर्जरी करनी है तो उनकी नाराजगी मोल लेनी ही होगी। सवाल सिर्फ प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का ही नहीं है। राज्य में काॅलेज और विश्वविद्यालयीन शिक्षा का हाल भी काफी बुरा है।
यदि परीक्षा में कदाचार के आधार पर ही विश्वविद्यालयों से इसी तरह डिग्रियां बटती रहेंगी, तो स्कूलों के लिए अच्छे शिक्षक आएंगे कहां से? 2006 में प्राप्तांक के आधार पर बहाल हुए शिक्षकों में से अनेक ऐसे हैं, जिन्हें अंग्रेजी में जनवरी-फरवरी तक की स्पेलिंग लिखनी नहीं आती। लालू प्रसाद के मुख्यमंत्रित्व काल में बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए लिखित परीक्षा के आधार पर प्रारंभिक शिक्षकों की बहाली हुई थी। उनमें से अधिकतर योग्य थे, क्योंकि उन प्रतियोगिता परीक्षाओं में कदाचार बहुत ही कम हुए थे। बीच की गलतियों से सीख कर अब फिर से परीक्षाएं ली जाने लगी हैं। पर, इन परीक्षाओं की पवित्रता के बारे में अनेक लोगों को शंका है।
जब राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं में कदाचार हो रहे हैं, तो सामान्य परीक्षाओं की बात कौन कहे? इन दिनों बिहार की स्थिति यह है कि किसी भी परीक्षा में जब कदाचार रोकने की कोशिश होती है तो सिर्फ परीक्षार्थी, बल्कि उनके अभिभावकगण भी हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। पीढ़ियों की बर्बादी रोकनी हो, तो सरकार को चाहिए कि वह सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हर स्तर पर जारी भीषण कदाच