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जदयू और राजद दोस्त हैं, पिछलग्गू नहीं : वशिष्ठ

7 वर्ष पहले
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जदयूके प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि जदयू और राजद एक-दूसरे के मित्र हैं। हमारे बीच पिछलग्गू होने जैसी कोई बात नहीं है। राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान पर मंगलवार को उन्होंने कहा कि हालात ने हमें एक साथ किया है। हमारे सामने बड़ी चुनौती है। हमलोग उसका मिल-जुल कर मुकाबला कर रहे हैं। भाजपा के इरादों को नाकाम करने के लिए ही जदयू ने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया है। तो हमें राजद के पीछे चलना है और ही राजद को हमारे पीछे चलने की जरूरत है।

राजद नेता ने कहा था कि राजद जदयू से बड़ा दल है, इसलिए राजद विधानसभा के चुनाव में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगा। जदयू ने बहुत-सी सीटें भाजपा की मदद से जीती हैं, इसलिए उन सीटों पर उसकी दावेदारी नहीं हो सकती है। जवाब में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा चुनाव में काफी देर हैं। कौन दल कितनी सीट पर लड़ेगा, यह अभी का सवाल नहीं है। जब सीटों के तालमेल पर बात होगी, तब आसानी के साथ इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा।

राजद ज्यादा सीटों पर लड़ेगा और जीतेगा

पटना| राजदके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि महागठबंधन में राजद ज्यादा ताकतवर दल है। ऐसे में राजद ज्यादा सीटों पर लड़ेगा और जीतेगा। राजद किसी का पिछलगुआ थोड़े हैं। राजद-जदयू में बड़े भाई और छोटे भाई के संबंध में कहा कि यह तय करना लालू प्रसाद और नीतीश कुमार का काम है। पर, यह तय है कि राजद जनाधार और ज्यादा क्षमता वाला दल है। पहले वाला (विधानसभा चुनाव 2010) फॉर्मूला नहीं चलेगा। उस समय जदयू को भाजपा के साथ गठबंधन के तहत सीटें मिली थीं। आज की क्षमता के मुताबिक राजद का हक ज्यादा है। ऐसे में उसी अनुसार सीट भी तय होगा।