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पैसे निकालने के लिए श्रममंत्री की फर्जी चिट्‌ठी बनाई

7 वर्ष पहले
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एकवर्ष से ठप राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसवीवाई) अभी शुरू भी नहीं हो सकी है और घोटाले का साया मंडराने लगा है। तत्कालीन श्रम मंत्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के फर्जी पत्र का सहारा लेकर योजना में शामिल होने के मामले का खुलासा हुआ है। श्रम संसाधन विभाग ने जांच में पाया कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन (टीपीए) का काम करने वाला मेडिकेयर सर्विसेज के पक्ष में लिखा गया यह पत्र फर्जी है। फर्जीवाड़े की आरोपी एजेंसी पर प्राथमिकी का आदेश दिया गया है।

मेडिकेयर सर्विसेज को ओरियंटल इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने मुजफ्फरपुर में टीपीए का काम दिया था। निजी अस्पतालों की मिलीभगत से गर्भाशय घोटाले को अंजाम देने का आरोप है। जाली बिल भुगतान कर बीमा राशि का बंदरबांट करने के आरोप में बीमा कंपनी ने इसे 2010 में ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। पत्र में तत्कालीन श्रम मंत्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने विभागीय सचिव को लिखा है कि मेडिकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कोलकाता को ब्लैक लिस्टेड करने का कोई औचित्य नहीं है। विभागीय सचिव ने पत्र की जांच कराई, तो पाया कि पत्र में जो पत्रांक भी फर्जी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना 2008-09 से राज्य में शुरू हुई थी। इलाज के लिए तीन वर्षों में 457 करोड़ की बीमा राशि दी गई। इनमें करीब 200 करोड़ से अधिक बीमा राशि का फर्जी तरीके से बंदरबांट कर लिया गया।

^तत्कालीन मंत्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल के फर्जी लेटर पैड का इस्तेमाल करने वाले मेडिकेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर एफआईआर होगा। पत्र देखने में ही फर्जी लग रहा था। जांच में यह बात साबित हो गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संजयकुमार, श्रमसंसाधन विभाग के सचिव

^ब्लैक लिस्टेड एजेंसी के पक्ष में पत्र लिखने का सवाल ही नहीं है। गलत गलत होता है। मैंने मेडिकेयर सर्विसेज के पक्ष में विभागीय सचिव को कोई पत्र नहीं लिखा है। मेरा फर्जी लेटर पैड बनाकर इस्तेमाल करना गंभीर मामला है। जांच कर इस पर कड़ी कार्रवाई हो। जनार्दनसिंह सीग्रीवाल, सांसदतत्कालीन श्रम संसाधन मंत्री

राज्य सरकार ने 2014-15 में इस योजना के लिए 75 करोड़ का आवंटन किया है, जबकि 75 प्रतिशत राशि यानी 225 करोड़ केंद्र सरकार देगी। लाभुक परिवार को बीमा कंपनियों के माध्यम से स्मार्ट कार्ड दिया जाता है। परिवार के मुखिया ‹