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नाटक में दिखा गुलामों का विद्रोह

7 वर्ष पहले
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नाटक में दिखा गुलामों का विद्रोह

डीबी स्टार > पटना

सदियाबीतगई लेकिन दुनिया से आज भी गुलामी खत्म नहीं हुई। हर बदलते दौड़ में और हर देश में गुलाम बनाए जाते रहे हैं, किसी किसी रूप में इंसान की यह गुलामी बरकरार है। गुलाम का मतलब ही रहा है बिना कोई आवाज उठाए अपने उपर हर शोषण को बर्दाश्त करने वाली निरीह इंसान। गुलामी के इतिहास में पहली बार जिन गुलामों की टोली ने आवाज उठाई वह स्पार्टकस थे।

गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए आवाज उठाने वाले इन्हीं बहादुर स्पार्टकस की कहानी बुधवार की शाम मंचित की गई नाटक स्पार्टकस में। तनवीर अख्तर निर्देशित इस नाटक का मंचन किया गया था इप्टा की ओर से संस्था के एग्जिबिशन रोड स्थित कार्यालय में। नाटक में गुलामी की जिंदगी जी रहे स्पार्टा राज्य के लोगों की कहानी दिखाई गई।

इसमें उनके गुलाम बनने से लेकर उनके शोषण और जानवरों से बदतर जिंदगी को दिखाया गया।