मिश्र ने दी इतिहास लेखन की शैली
बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय में आयोजित व्याख्यान माला में उपस्थित डॉ. विजय कुमार, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. निहार नंदन प्रसाद सिंह, प्रो. सुरेंद्र गोपाल और डॉ. राज्यवर्द्धन शर्मा (बाएं से)
डीबी स्टार > पटना
इतिहासलिखनेका सबसे अच्छा तरीका प्रो. बीबी मिश्र ने ही बताया। उनकी लेखनी में स्रोत की सटीक और पुख्ता जानकारी होती थी। ये बातें मुख्य वक्ता जेएनयू के प्रो. दीपक कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बहुत सारे साक्ष्य को मिटा दिया जा रहा है। ऐसे हालात में आखिर किसे आधार को मानकर इतिहासकारों की अगली पीढ़ी जानकारी इकट्ठा करेगी। उन्होंने कहा कि जानकारी इकट्ठा करने के लिए जिस प्रकार से इंटरनेट का प्रयोग हो रहा है, इससे तो यही लगता है कि आजकल के बच्चे किताब और शिक्षक से कम ही पूछना चाहते हैं। लेकिन, सच्चाई यह है कि जानकारी और सही स्रोत के लिए शिक्षक से बेहतर कोई दूसरा नहीं। उनके पास किताब की पुख्ता जानकारी होती है।
प्रो. मिश्र की जीवनी के बारे में बताया कि उनका अधिकांश समय उपनिवेशवाद के राजनीतिक सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के अध्ययन में व्यतीत हुआ। वे कार्यालयी स्रोत पर ज्यादा निर्भर थे। उन्होंने इतिहास के एक मानक तय किया जो आने वाले समय में प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रशासन एवं अर्थव्यस्था को समुचित संचालन के लिए विज्ञान वरदान है। ईस्ट इंडिया कंपनी के काल से ही वर्ष 1759 में इसकी शुरुआत हुई जिसका संचालन एंडरसन ने किया।
कार्यक्रम में प्रो. दीपक कुमार के साथ अभिलेख निदेशक डॉ. विजय कुमार, बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. निहार नंदन प्रसाद सिंह, पटना विवि के पूर्व प्रो. सुरेंद्र गोपाल, बिहार लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. राज्यवर्द्धन शर्मा, डॉ. अजीत कुमार सिन्हा, चंद्रप्रकाश सिंह, प्रो, प्रभाकर सिंह, डॉ. बादशाह चौबे, डॉ. चंद्रमोहन सिंह, संजय कुमार खां, उदय कुमार ठाकुर, डॉ. उर्मिला कुमारी, डॉ. नागेंद्रनाथ झा, डॉ. भारती शर्मा, डॉ. चिंतन चंद्रा, डॉ. मदन मिश्र, रामकुमार सिंह उपस्थित थे।