विभाग का आराेप, नगर आयुक्त का जवाब
नगर आयुक्त कुलदीप नारायण ने विभाग द्वारा पूछे गए स्पष्टीकरण में 20 नवंबर, 2014 को बिंदुवार जवाब दिया था। कुलदीप नारायण पर पांच आरोप लगाए गए थे। पांच अारोप का जवाब उन्होंने विभाग को प्रमाण के साथ कुल 387 पेज में दिया था। आठ पेज में पांच सवालों का जवाब जबकि शेष पेज में जवाब से संबंधित सबूत दिए गए।
1. नियमित फॉगिंग नहीं होने से डेंगू से कई लोगों की मौत हुई ?
जवाब: फाॅगिंग को गंभीरता से लिया गया। मेरे स्तर से कोताही नहीं की गई। डेंगू का कारण मात्र फॉगिंग होना या होना नहीं है, फिर भी इस वर्ष डेंगू के मामले की संख्या पिछले वर्षों से कम है।
2.ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मद में करोड़ों हाेने के बावजूद उपकरण नहीं खरीदने और डोर टू डोर कचरे के उठाव की व्यवस्था नहीं होने से निगम क्षेत्र कचरे के ढेर पर है।
जवाब: ठोस अवशिष्ट प्रबंधन से संबंधित राशि पिछले दस साल से पड़ी थी। सफाई से संबंधित उपकरण की खरीद और डोर टू डोर कचरा संग्रहण के लिए पहली बार व्यवस्थित एवं कड़ी कार्रवाई मेरे समय में ही की गई। इस संबंध में मुख्य अभियंता के स्तर से टेंडर का प्रकाशन किया गया।
3.नागरिकों को अतिक्रमणमुक्त सड़क एवं नाला उपलब्ध नहीं कराया गया। हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। अवैध भवन निर्माण पर रोक लगाने संबंधी दिए गए आदेश दिए गए। इसका भी अनुपालन पूरी तरह नहीं हुआ।
जवाब: पटना शहर क्षेत्र में बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर हो रहे अवैध निर्माण के विरुद्ध न्यायालय के आदेशों का पूर्णत: पालन करते हुए मेरे कार्यकाल में बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है। ऐसा अब तक किसी भी नगर आयुक्त ने नहीं किया।
4.वित्तीय वर्ष 2012-13-14 और 2014-15 में विभाग ने पथ नाला निर्माण तथा नागरिक सुविधा मद में निगम को पैसे दिए। इसका उपयोग नहीं हुआ।
जवाब: जनहित से संबंधित काम मेरे कार्यकाल में सबसे अधिक हुआ है। वर्ष 2012-13 की तुलना में 2013-14 में लगभग 93 प्रतिशत अधिक राशि विकास कार्य पर खर्च के लिए जारी की गई। 2014-15 में मात्र सात महीने में 2012-13 की तुलना में चार गुना अधिक राशि खर्च के लिए जारी की गई।
5.अफसर-कर्मचारी राजनीति में लिप्त हैं?
जवाब-ऐसा नहीं है। वे काम कर रहे हैं।