यूथ हॉस्टल से निकल रही मिथिला की खुशबू
पटनाकेयूथ हॉस्टल परिसर में आम के पेड़ के नीचे खड़े होकर मैथिली में बातें करते लोगों का समूह और पास में ही मिथिला के पकवानों के स्टॉल सजे हैं। इन स्टॉलों पर मौजूद है मखाना की खीर, चूड़ा घुघनी, टेकुआ और निमकी जैसे पकवान। पास में ही मधुबनी चित्रशैली वाली पेंटिग्स मौजूद है। ताे दूसरी ओर मैथिली साहित्य की किताबों की दुनिया सजी है। वहीं यूथ हॉस्टल के हॉल में मैथिली साहित्य पर परिचर्चा चल रही है। कुल मिलाकर शुक्रवार को यूथ हॉस्टल पूरी तरह से मैथिली संस्कृति के रंग में रंगा जा चुका है। मैथिली संस्कृति और मिथिला की माटी की खुशबू यहां चारों ओर मनमोहक छटा बिखेर रही थी।
यह मौका था यहां चल रहे मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल का जिसे मैथिली लेखक संघ, मैथिली महिला संघ, भंगिमा, प्रतिमान पटना, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, बोकारो, झारखंड मैथिली मंच, रांची की ओर से आयोजित किया गया था। फेस्टिवल के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत मैथिली के उन साहित्यकारों को श्रद्धांजलि देने से हुई जो बीते एक वर्ष में दिवंगत हो चुके हैं। इसके बाद फेस्टिवल का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इसमें आयोजन समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र झा ने कहा कि मैथिली साहित्य की रचना और बिक्री आज साहित्यकार अपने स्तर से ही कर रहे हैं। यही हाल मिथिला के हस्तशिल्प का भी है। साहित्यकारों और कलाकारों को बाजार नहीं मिल पाता, उन्हें बाजार मुहैया कराने के लिए सरकारी स्तर से बड़े पैमाने पर प्रयास करने की जरूरत है। इस मौके पर गोविंद झा, रामावतार यादव, राजमोहन झा, महेन्द्र नारायण कर्ण, नवल किशोर चौधरी, वीणा ठाकुर, समेत कई अन्य ने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं मंच संचालन छत्रानंद सिंह झा ने किया।
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान मैथिली के साहित्यकारों ने मौजूदा साहित्य और उनकी चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान मैथिली समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।
खिस्सा कहय खिसनी में सुनाई कहानी
यहां होने वाले खिस्सा कहय खिसनी कार्यक्रम के तहत मैथिली की लोकथाअों का कंटीर मुखिया और परमेश्वर कापड़ि ने जीवंत वर्णन कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं अादान प्रदान कार्यक्रम में मैथिली से अन्य भाषाओं में और अन्य भाषाओं से मैथिली में अनुवाद पर चर्चा की गई। इसमें गंगा प्रसाद अकेला, मेनका मल्लिक और राम नारायण सिंह ने भाग लिया। मंच संचालन रमानंद झा रमन ने किया।
बहुत दिवस छल म