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नहीं मिल रहे 5 किलो के सिलेंडर

7 वर्ष पहले
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पांचकिलो के गैस सिलेंडर को पटना में लांच हुए अब दो महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब भी यह ये बाजार में नहीं मिल रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पेट्रोल पंप पर उपलब्ध कराने का दावा साकार होता नहीं दिख रहा है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में परीक्षण के तौर पर योजना को सफल मानकर सरकार ने पटना में भी इसे शुरू किया था। पटना में अभी इसे पेट्रोल पंपों पर बिकना है। पटना के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का अगला चरण रूका पड़ा है।

गैससे लेकर रेगुलेटर तक, सब कुछ कॉमर्शियल रेट पर : इंडियनऑयल से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पांच किलोग्राम के सिलेंडर पर सब्सिडी नहीं है। पटना में इसका मूल्य 488 रुपए है (करीब 100 रुपए प्रति किलो)। जबकि बाजार में बिक रहे 5 किलो के अवैध सिलेंडर मात्र 80 रुपए प्रतिकिलो मिल रहे हैं।

क्याहै वास्तविक समस्या : सरकारीआदेश के दबाव में एलपीजी के इन सिलेंडरों को लांच तो कर दिया गया, पर सबसे बड़ी समस्या सिलेंडरों की रिफिलिंग को लेकर है। इंडेन के एक रिफिलिंग अधिकारी बताते हैं कि पांच किलो सिलेंडर के लिए अभी तक पृथक असेंबली लाइन नहीं बनी है। महज 50-100 सिलेंडरों के लिए पूरी असेंबली लाइन को छोटी साइज के अनुसार री-एलाइन करना तकनीकी रूप से जटिल है।

ट्रांसपोर्टेशन और हैंडलिंग का जोखिम

छोटेसिलेंडरों के ट्रांसपोर्टेशन और हैंडलिंग में जोखिम अधिक है। चूंकि, गैस सिलेंडर का एससी वॉल्व गैस को निकलने से रोकता है। यह तरल रूप से बहने वाले पदार्थों को रोकने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए जब भी कोई व्यक्ति मोटर साइकिल से गैस सिलेंडर ले जा रहा हो, तो जरूरी है कि उसे सीधा रखे। सिलेंडर पोर्टेबल होने के कारण उसकी हैंडलिंग में लापरवाही होती रहती है। नीले रंग के 5 किग्रा के इन सिलेंडरों की खरीदारी के लिए मात्र एक फोटो आईकार्ड की छायाप्रति की जरूरत होती है।