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जहां मर्ज, मशीन वहीं पहुंचा देगी दवा

6 वर्ष पहले
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अजय कुमार सिंह|पटना @ajaysingh524

लीवरसिरोसिस, किडनी, हॉर्ट, ब्रेन स्ट्रोक और स्पाइनल कार्ड की गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का इलाज पटना एम्स में जल्द हो सकेगा। इसके लिए नए भवन में डिजिटल सब ट्रैक्शन एंजियोग्राफी मशीन लगाई जा रही है। इसकी कीमत करीब सात करोड़ रुपए है। दो मई तक यह मशीन लग जाएगी। इसके बाद एक-दो दिन तक ट्रायल चलेगा। तब मरीजों को इसकी सुविधा मिलेगी। इस आधुनिक तकनीक वाली मशीन की खासियत यह है कि जहां तकलीफ है, वहीं दवा ऑर्टरी के माध्यम से पहुंचायी जाएगी। पूरे शरीर में दवा भेजने की जरूरत नहीं होगी।

इस मशीन से स्टेम सेल के जरिए भी विभिन्न अंगों का इलाज भी होगा। मशीन की मदद से उसी अंग को स्टेम सेल भेजा जा सकेगा, जहां उसकी जरूरत है। स्टेम सेल से किडनी की बीमारी या लीवर सिरोसिस के मरीजों का इलाज होगा। स्टेम सेल से लीवर, किडनी या फिर हॉर्ट को रीजनरेट किया जा सकता है। वैसे भी, बिहार में लीवर और किडनी के मरीजों की संख्या अधिक है। डिजिटल सब ट्रैक्शन एंजियोग्राफी से शरीर के सिर्फ ब्लड वेसल का पिक्चर साफ नजर आता है। ब्लड वेसल में कहां गड़बड़ी है, इसका पता चल जाएगा।

इस तकनीक से इलाज कराने पर समय कम लगेगा। दर्द और परेशानी भी कम होगी। बड़े निजी अस्पतालों में इस मशीन से इलाज कराने में लाखों रुपए देने होते हैं, जबकि पटना एम्स इलाज 10 से 20 हजार रुपए में ही हो जाएगा। बिहार के सरकारी अस्पताली में यह पहली आधुनिक मशीन होगी।

टारगेटेड ड्रग डिलेवरी...

टारगेटेडड्रग डिलेवरी से मरीज के इलाज की भी सुविधा शुरू होगी। यानी जिस अंग को इलाज या दवा की जरूरत है, उसी अंग को दवा भेजी जाएगी। किसी अंग का स्टेम सेल से इलाज में भी यह मशीन मददगार साबित होगा। संस्थान के निदेशक डॉ.गिरीश कुमार सिंह के मुताबिक, ब्रेन स्ट्रोक, हॉर्ट अटैक, किडनी, लीवर सिरोसिस और स्पाइनल कार्ड के मरीजों के इलाज में इस मशीन की मदद ली जाएगी। ब्रेन स्ट्रोक होने पर खून का थका जम जाता है और मरीज लकवा का शिकार हो जाता है। उस जमे खून को हटाने के लिए इस मशीन से मदद मिलेगी।