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बाढ़ में विस्थापित परिवारों को लीज पर लेकर दी जाएगी जमीन
राज्यसरकार ने बाढ़ और कटाव पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भूमि अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया को आसान बनाने की घोषणा की है। सूबे में ऐसे परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन के अधिग्रहण में हो रही देरी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलाधिकारियों को लीज पर जमीन लेने के लिए अधिकृत किया है।
विभाग ने बिहार रैयती भूमि लीज नीति 2014 में बदलाव किया है। अब बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारी लीज पर जमीन ले सकेंगे साथ ही इसका वितरण प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए किया जा सके।
काफीवक्त लगता था
अभीतक जमीन का चयन संबंधित जिलाधिकारी द्वारा किया जाता था और विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने और राशि का आवंटन होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाती थी। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी वक्त लगता था।
क्यों पड़ी आवश्यकता
सूबेमें लीज पर जमीन लेने की जटिल प्रक्रिया के कारण बाढ़ और कटाव के कारण विस्थापित परिवारों के पुनर्वास में काफी कठिनाई हो रही थी। भूमि के अधिग्रहण में काफी समय लगता है। इसलिए सरकार ने लीज नीति में बदलाव किया है और लीज पर जमीन लेने का अधिकार जिलाधिकारियों को सौंपा है। अब राज्य के बाढ़ प्रभावित 28 जिलों के जिलाधिकारी विस्थापित हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन का आवंटन और प्रशासनिक स्वीकृति दे सकेंगे। हालांकि जमीन लीज पर लेने के लिए राशि का आवंटन आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किया जाएगा।
अधिग्रहण की लंबी प्रक्रिया के कारण बाढ़ पीड़ितों को जमीन मिलने में हो रही देरी