उभारा भगवान राम का चारित्रिक पक्ष
वनबंधुपरिषदपटना चैप्टर के तत्वावधान में रविवार को भारतीय नृत्य कला मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र के जीवन चरित्र पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। राधिका क्रियेशन्स, नागपुर की ओर से मंचित इस नाटक के निर्देशक थी सारिका पेंडसे। नाटक में श्री रामचंद्र के जीवन को दिखाकर यह संदेश दिया गया कि समाज के लिए वह एक आदर्श हैं।
नाटक में अहिल्या से जुड़े प्रसंग के माध्यम से दिखाया गया कि श्राप के कारण पत्थर में बदल चुकी अहिल्या भगवान राम के चरण स्पर्श को पाकर ही वापस मानव शरीर ग्रहण कर लेती है। आधुनिक जीवन में भी यह घटना नारी की मुक्ति की बात कहती है। नाटक में भगवान राम का वनों से जुड़ाव दिखाते हुए वनवासियों के महत्व को भी दिखाया गया।
इस मौके पर वनबंधु परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक रामेश्वर लाल काबड़ा ने कहा कि वनवासियों के जीवन की कठिनाइयों को समझने के लिए संपन्न लोग वनों की यात्रा पर जाएं। कई बड़े उद्योगपति वनवासियों के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। इस मौके पर पद्मश्री डॉ नरेंद्र प्रसाद का अभिनंदन किया गया। आचार्य चंद्रभूषण मिश्र, मोती लाल खेतान, राधेश्याम बंसल, सुनील खेमका, विमल जैन, महेश जालान, पद्मश्री गजेंद्र नारायण उपस्थित रहे।
पटना। छठाअखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव 2015 का आयोजन 11 फरवरी से कालिदास रंगालय में होने जा रहा है। 17 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में रोजाना ही देश की प्रतिष्ठित रंग संस्थाओं की ओर से नाटकों की प्रस्तुति दी जाएगी। महोत्सव का आयोजन कला जागरण और मगध कलाकार की ओर से किया जा रहा है। आयोजन समिति की रविवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि डॉ. चतुर्भुज की स्मृति में होने वाले इस महोत्सव में रोजाना ही 6.30 बजे से नाटकों का मंचन किया जाएगा।
इसके बारे में जानकारी देते हुए कला जागरण के अध्यक्ष गणेश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि पहले दिन बिहार आर्ट थियेटर की ओर से नाटक अंधा युग का मंचन किया जाएगा। इसके बाद 12 फरवरी को पश्चिम बंगाल के थियेटर शाइन की ओर से नाटक री-एक्सप्लोेरेशन का मंचन होगा। 13 फरवरी को इलाहाबाद के विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान की ओर से नाटक लैला मजनू का मंचन किया जाएगा। 14 फरवरी को रंगराजन थियेटर प्रोडक्शन, नई दिल्ली की ओर से नाटक भामा शाह, 15 फरवरी को पुण्यार्क कला निकेतन, पंडारक की ओर से नाटक सिराजुद्दौला, 16 फरवरी को एकता ग्रुप भागलपुर की ओर से नाटक अंगुलीमाल और 17 फरवरी को इम्फाल की संस्था इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रेडिशनल आर्ट्स एंड कल्चर की ओर से नाटक केंग्डू का मंचन किया जाएगा। वहीं मगध कलाकार के सचिव अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि 15 फरवरी को दोपहर 12 बजे से 21वीं शताब्दी में ऐतिहासिक नाटकों की प्रासंगिकता विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार, अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा, सुशील शर्मा, डॉ किशोर सिन्हा, कन्हैया प्रसाद, कुमार शांतरक्षित, रमेश सिंह, यामिनी, हीरा लाल राय, विजय कुमार सहित कई अन्य मौजूद थे।
11 फरवरी से होगा अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्य महोत्सव
drama
यह थे कलाकार
मंचपर- अजीतकुमार, मोना झा, जावेद अख्तर खां, सुजीत सिंह, रवि महादेवन, उमाकांत झा, विनोद कुमार, निवेदिता झा, रवि कुमार।
निर्देशक - परवेज अख्तर
प्रकाशपरिकल्पना
विजयेंद्रकुमार टॉक
ध्वनिप्रभाव- सोनलनारायण
वेश-भूषा-नगमाखान
मेकअप
अशोकघोष, चंदना घोष
नाटक ने हिंसा आधारित क्रांतियों पर उठाया सवाल
पटना।क्रांतिके नाम पर हिंसक घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। हर विचारधारा को मानने वाले अपने हिसाब से दुनिया को बदलना चाहते हैं और बदलावों के लिए हिंसा का सहारा लेने से भी नहीं हिचकते। इन क्रांतियों के लिए हुई हिंसा में भी आम आदमी मारा जाता है। हिंसा और प्रतिहिंसा के इस दौर में कहीं कहीं नुकसान मानवता का ही होता है। यह बात कह गया रविवार को प्रेमचंद रंगशाला में हुआ नाटक न्यायप्रिय। अल्बेयर कामू के लिखे और नटमंडप की प्रस्तुति इस नाटक के निर्देशक थे परवेज अख्तर। नाटक में क्रांतियों के नाम पर होने वाली हिंसाओं को दिखाया गया।
यह थी कहानी
नाटक की कहानी गुलाम भारत के दौर की थी। इसमें दिखाया गया कि एक भूमिगत क्रांतिकारी दल अंग्रेज कलेक्टर की हत्या करने की योजना बनाता है। इस दल का शेखर इस कार्रवाई को अंजाम देने के जब जाता है तो अंग्रेज की बग्घी में बच्चों को देखकर बम नहीं फेंक पाता। दल में इसको लेकर तीखी बहस होती है। दल की पुरानी साथी दमयंती शेखर से प्रेम करती है। दल प्रमुख बलदेव दो दिन बाद बम फेंकने की योजना बनाता है। कलेक्टर की हत्या के बाद शेखर गिरफ्तार हो जाता है। शेखर को फांसी हो जाती है, फांसी से दमयंती गहरी पीड़ा के दौर से गुजरने लगती है और अगला बम फेंकने और फांसी के तख्ते पर पहुंचने का निश्चय करती है। नाटक अपनी कहानी और संवादों से दर्शकों को भावविभोर कर देता है। पुराने दौर की कहानी वाला यह नाटक मौजूदा दौर में चारों ओर चल रही हिंसक घटनाओं, नक्सली घटनाओं, आतंकवाद और उग्रवाद पर भी चोट करता है।