पटना-दीघा रोड पर अं
1. अंतिमनिवास अब राजेन्द्र स्मृति संग्रहालय
2.अंतिमनिवास की ताजा तस्वीर
3.डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ
4.डॉराजेन्द्र प्रसाद पंडित जी और सुभाष चंद्र बोस के साथ
5.डॉराजेन्द्र प्रसाद का देहावसान स्थल
6.अनुग्रहबाबू के साथ सदाकत आश्रम में राजेन्द्र बाबू
7.जबराजेंद्र बाबू 10वीं कक्षा के छात्र थे
8.राजेन्द्रस्मृति संग्रहालय में बापू के साथ
9.उच्चशिक्षा के दौरान ऐसे दिखते थे देशर|
पटना-दीघा रोड पर अंग्रेजाें के जमाने से कांग्रेस मुख्यालय है। इसी के पास है बिहार विद्यापीठ। सड़क से गुजरते समय बिहार विद्यापीठ का बोर्ड देख कोई नहीं समझ सकता कि इसके अंदर उस शख्स की स्मृतियां संग्रहित हैं, जिसने देश को संविधान दिया। 06 फरवरी 1921 को महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार विद्यापीठ के संस्थापक प्राचार्य थे। मौलाना मजहरूल हक के मित्र खैरू मियां की जमीन पर इसकी स्थापना हुई थी। असहयोग आंदोलन में अंग्रेजी स्कूल-कॉलेज छोड़ने वालों की पढ़ाई जारी रखने के लिए इसकी स्थापना की गई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद अंतिम समय इसी जगह पर रहे। यहीं अंतिम सांस ली। उस कमरे को उसी तरह रखा गया है। राजेंद्र बाबू की दुर्लभ तस्वीरें और उनके उपयोग में आए सामान धरोहर के रूप में सहेज कर रखा है बिहार विद्यापीठ ने।
फोटो/इन्फाे: नेशात/शशि
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History & Heritage
देशर|डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देशभर में काम किया, लेकिन शुरुआत यहीं से की और अंतिम सांस भी यहीं ली।