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वेंडर से लेकर पानी की बोतल तक अवैध

6 वर्ष पहले
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पटनाजंक्शन पर ब्रांडेड पानी की जगह लोकल पानी धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। अवैध वेंडर और अवैध पानी का कारोबार लाखों का है। ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी रेलवे के अधिकारियों को नहीं है, लेकिन उनका कहना है कि इस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आरपीएफ और जीआरपी की है।

वहीं, आरपीएफ और जीआरपी का वही रटा-रटाया जवाब है कि हम कार्रवाई करते हैं। अब सवाल ये है कि ये कार्रवाई करते हैं तो असर दिखता क्यूं नहीं। चलती ट्रेन में भी पैंट्रीकार वाले लोकल पानी बेच रहे हैं। इससे सिर्फ लोगों को नुकसान हो रहा है, बल्कि रेलवे को भी राजस्व की हानि हो रही है।

जंक्शन पर अवैध लोकल पानी की बोतलें सबसे ज्यादा अवैध वेंडर्स के हाथों बेची जा रही हैं। जंक्शन के आसपास के खुले रास्तों से घुसपैठिए वेंडर्स द्वारा हर दिन लोकल ब्रांड की करीब सैकड़ों पानी की पेटियां जंक्शन पर पहुंचाई जाती हैं। हर पेटी में 12 बोतलें होती हैं। इस हिसाब से हर दिन जंक्शन पर हजारों लोकल ब्रांड की पानी की बोतलें खपाई जा रही हैं। जंक्शन पर अधिकृत रेल नीर की 12 बोतल वाली एक पेटी का दाम 126 रुपए है। इसमें से हर बोतल की बिक्री 15 रुपए में होती है। वहीं लोकल ब्रांड की एक पेटी महज 80 से 100 रुपए में आती है। लोकल पानी बेचने पर वेंडरों को लगभग 50 रुपए का अधिक फायदा होता है।

रेलनीर के साथ 13 ब्रांड को रेलवे ने दी मंजूरी : रेलवेने रेल नीर के साथ 13 ब्रांड की मंजूरी दी है। ये ब्रांड हैं अनुमोदित : बैली, किनले, बोनाक्युआ, बिस्लेरी, आइसलिंग, किंगफिशर, प्रीमियम, त्रिवेणी, एचजीओ, हेल्थ प्लस, पवन एक्युआ, एक्युआफिना और माउंट कैलाश।

^ बिहार की जहां तक बात करें तो रेल नीर पानी की अनुमति दी गई है। अवैध वेंडर अगर ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर बेचते हैं तो इसकी जिम्मेवारी आरपीएफ, जीआरपी एवं स्टेशन मैनेजर की है। सुबोधकुमार, पीआरओ

^समय-समयपर कार्रवाई होती है, लेकिन ये अवैध वेंडर दूसरे रास्ते से कब घुसते हैं पता ही नहीं चलता। ये ट्रेन आने पर आते हैं आर फिर बाहर हो जाते हैं। इससे इन्हें पकड़ने में परेशानी होती है, लेकिन कार्रवाई जारी है। राजेशलाल, थाना प्रभारी, आरपीएफ