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पार्टियों के क्रियाकलाप पर हाईकोर्ट के आदेश का असर नहीं पड़ेगा

6 वर्ष पहले
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पटनाहाईकोर्ट ने कहा कि बुधवार को पारित आदेश का कोई प्रभाव जदयू सहित किसी भी राजनीतिक दलों के आंतरिक क्रियाकलापों पर नहीं पड़ेगा। बुधवार को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्यपाल का निर्णय होने तक नीतीश कुमार को जीतन राम मांझी के स्थान पर जदयू बिहार विधानमंडल विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता देने संबंधी स्पीकर के आदेश का कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल नरसिंह रेड्डी न्यायमूर्ति विकास जैन की खंडपीठ ने गुरुवार को नीतीश कुमार के वरीय अधिवक्ता पीके शाही की दलील सुनने के बाद बुधवार को दिए गए आदेश को स्पष्ट किया। शाही का कहना था कि जदयू विधायक राजेश्वर राज की ओर से दायर पीआईएल सुनवाई के योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि बुधवार के आदेश को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सभी समझ रहे हैं कि नीतीश कुमार के नेता चुने जाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

हमजांचना चाहते हैं

मुख्यन्यायाधीश ने कहा- विधानसभा के प्रभारी सचिव के पत्र में कहा गया है कि मांझी के स्थान पर नीतीश कुमार को नेता बना दिया गया है। यह आदेश किस प्रावधान के तहत पारित किया गया? कोई प्रावधान नहीं होने के कारण ही हमने कहा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत मान्यता दिए जाने संबंधी आदेश जारी हुआ और उसके क्या लीगल इम्पलीकेशंश होंगे। इसको हम जांचना चाहते हैं। वैसे भी कौन मुख्यमंत्री होगा, उसका निर्धारण विधानसभा के पटल पर ही होगा। जिसके पक्ष में बहुमत होगा उसे राज्यपाल शपथ दिलाएंगे। बुधवार के आदेश में हमने किसी के नेता चुने जाने पर रोक नहीं लगाया है।

अबपीआईएल का नहीं रहा औचित्य

पीकेशाही का कहना था कि राज्यपाल 20 फरवरी को विधानसभा सत्र को संबोधित करेंगे और उसके बाद ही बहुमत साबित किया जाएगा। इसलिए भी अब इस पीआईएल का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इसपर मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि इसी बिंदु पर विचार करने के लिए हमने कहा कि हम कानूनी प्रावधान को देखना चाहते हैं। मामले पर 18 फरवरी को फिर सुनवाई होगी। सुनवाई में विस के प्रभारी सचिव की ओर से वरीय अधिवक्ता वाईवी गिरि ने भी भाग लिया।