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छात्र हैं, भवन, प्राध्यापक हो गए नियुक्त
पारदर्शी व्यवस्था से संभव है शिक्षा का विकास
जेपी विश्वविद्यालय में निगरानी का छापा, कागजात जब्त कर ले गए
मेडिकलकॉलेज, समस्तीपुर (राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय) के लिए अब तक भवन है छात्रों का एडमिशन ही हुआ, पर प्राध्यापकों की सिर्फ पोस्टिंग हो गई, बल्कि कईयों ने योगदान भी दे दिया। मेडिकल कॉलेज के 19 सीनियर रेजिडेंट और 8 सहायक प्राध्यापक पटना और दरभंगा से पदस्थापित किए गए हैं जिसमें 5 सीनियर रेजिडेंट और एक सहायक प्राध्यापक ने योगदान दे दिया है।
उजियारपुर प्रखंड क्षेत्र में अभी मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन का चयन किया गया है लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ही कोई बुनियादी ढांचा ही खड़ा किया गया है। वर्ष 2015 के लिए वर्ग संचालित के लिए नामांकन का भी आदेश नहीं है। इस वर्ष नामांकन का आदेश भी नहीं मिलने की ही संभावना है, पर प्राध्यापकों की पोस्टिंग कर दी गई।
सदर अस्पताल संचालित, पर दर्जा नहीं
समस्तीपुरसदर अस्पताल वर्षों से संचालित है लेकिन अब तक इसे अनुमंडलीय अस्पताल का ही दर्जा है। वहीं पटोरी अनुमंडल में संचालित अनुमंडलीय अस्पताल है जो अभी तक पीएचसी का ही दर्जा रखता है। समस्तीपुर में मेडिकल कॉलेज संचालित करने का आदेश होने के बाद सीएस गिरिन्द्र शेखर सिंह ने भी बैठक में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि समस्तीपुर अनुमंडलीय अस्पताल को अभी तक जिला अस्पताल का भी दर्जा नहीं मिल पाया है और पटोरी के अनुमंडलीय अस्पताल का तो अधिकारी आश्चर्य व्यक्त करने लगे। एेसी स्थिति के पीछे अधिकारियों की लापरवाही हो सकती है। इस संबंध में कभी सोचा ही नहीं गया। यह जिले के लोगों की बदकिस्मती है।
मेडिकल काॅलेज के लिए पदस्थापित प्राध्यापकों और सीनियर रेजिडेंट के संबंध में सीएस ने पुष्टि करते हुए बताया कि जो प्राध्यापक रेजिडेंट ज्वाइन कर लिये हैं वे फिलहाल सदर अस्पताल में ही कार्य करेंगे।