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राष्ट्रीय गेम्स में बिहारी एथलीट केरल खेलने गए हैं या घूमने ?

6 वर्ष पहले
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फिटनेस की कमी

100 % भागीदारी नहीं

नेशनलगेम्स 14 फरवरी को समाप्त जाएगा। अब तक बिहार ने मात्र सात पदक जीते हैं, जो रांची (12) से भी पांच कम हैं। इस गेम्स से अंतिम पदक बिहार को सोमवार को लॉन बॉल में मिला था। बिहार के खेल प्रशंसक को नौ फरवरी से शुरु हुई एथलेटिक्स स्पर्द्धा में पदक की उम्मीद थी, लेकिन वह पूरी नहीं होती दिख रही है। कारण हैं तैयारियों कमी और संघ की मनमानी।

कई एथलीट तो टूर्नामेंट में नाम रहने के बाद हिस्सा नहीं ले रहे हैं। ऐसा हो रहा है संघ की मनमानी की वजह से। नेशनल गेम्स में कई खिलाड़ियों का एथलेटिक्स टीम में चयन किया गया है, जो कई साल पहले खेल छोड़ चुके हैं और वर्तमान में तकनीकी पदाधिकारी हैं।

परिणाम नेशनल गेम्स की वेबसाइट पर से ली गई है।

{12 फरवरी को : 4गुणे 100 मीटर में दीपेंदर कुमार, नवीन कुमार, रूद्र प्रतिम सिंह, महंथ कुमार सिंह , 800 मीटर महिला रेस में सौगंधा कुमारी। 10 हजार में प्रतिमा कुमारी, 200 मीटर में विप्लव दास ने हिस्सा नहीं लिया। ट्रिपल जंप में चंदन कुमार यदुनंदन की भागीदारी नहीं दिखी।

{11 फरवरी को : 20किमी. वॉल्क में विश्वजीत कुमार जायसवाल ने हिस्सा नहीं लिया।

{10 फरवरी को : पुरुषकी 15 सौ मीटर दौड़ में शकिल मोहम्मद और महेश कुमार, 100 मीटर में सुनंदा सरकार और शॉटपुट में नीरज कुमार ने भाग ही नहीं लिया।

{9 फरवरी को : पुरुष5000 मीटर दौड़ में मनोहर लाल वर्मा और विश्वजीत कुमार की भागीदारी नहीं दिखी।

गेम्स में बिहार के एथलीटों के प्रदर्शन को देखते हुए उनकी तैयारी पर सवाल उठने लगे हैं। गुरुवार को भीम बहादुर लिंबु 10 हजार मीटर की दौड़ पूरी नहीं कर सके। 10 फरवरी को हाईजंप में भी दुर्गा चरण और अमरेंद्र क्वालिफाई ही नहीं कर सके। ऐसा अधिकतर खिलाड़ियों में भी देखने को मिला।