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मणिपुर में दूसरे दिन भी बिहारी छात्रों को पीटा
ग्रेवी मांगने केकारण हुआ विवाद
जुलाई मेंभी हुआ था छात्रों पर हमला
शिक्षक बोले बिहारियोंको पीटो
एनआईटी मणिपुर में बिहारी छात्रों पर स्थानीय छात्रों का कहर शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। उपद्रवियों को शिक्षकों और वहां की पुलिस का संरक्षण भी मिल रहा है। स्थानीय छात्रों ने बिहारी छात्रों की फिर पिटाई की। मामले की जांच के लिए पहुंची पुलिस ने भी उन्हें पीटा। पिटाई से 14 छात्र घायल हैं। बिहारी छात्रों को हॉस्टल में ही बंधक बना लिया गया है। बाहर निकलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात की। उन्होंने छात्रों को पूरी सुरक्षा देने का अनुरोध किया। मांझी ने उनसे मणिपुर के सीएम से भी बात करने की अपील की। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने भी मणिपुर के मुख्य सचिव से बात की। सिंह ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
उधर, छात्राें ने बताया कि बिहार के गृह सचिव अमीर सुबहानी मणिपुर के डीजीपी के बीच हुई बात के बाद पुलिस शुक्रवार की देर रात संस्थान पहुंची। लेिकन शिक्षकों ने हिंदीभाषी छात्रों को उपद्रवी करार देते हुए उनकी पिटाई करने को कहा। फिर पुलिसवालों ने उनकी धुनाई कर दी। छात्रों ने बिहार सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
एनआईटी मणिपुर में 30 जून 2014 को भी बिहारी छात्रों पर हमला हुआ था। छात्रों ने बताया कि पिछली बार भी बिना गलती के निशाना बनाया गया था। छात्रों ने सवाल किया कि अगर बाहरी छात्रों को संस्थान प्रबंधन सुरक्षा नहीं दे सकता है तो फिर दाखिला क्यों लेता है। छात्रों ने बताया कि बिहार, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश के विद्यार्थी सहमे हुए हैं।
बीटेक प्रथम वर्ष के दो छात्रों ने शुक्रवार की दोपहर कैंटीन में अधिक ग्रेवी की मांग की। इस पर स्थानीय छात्रों ने कहा-सारा ग्रेवी बिहारी भइया खा जाते हैं। इस पर बिहार यूपी के विद्यार्थियों ने आपत्ति जताई। इसके बाद स्थानीय छात्र भड़क गए। दोनों तरफ से लात-घूंसे चले। फिर स्थानीय छात्रों ने बिहारी छात्रों को शाम में बाहर निकलने पर सबक सिखाने की धमकी दी। शाम को दो बिहारी छात्र बाहर नाश्ता करने गए। एनआईटी के स्थानीय छात्रों के अलावा दर्जन भर छात्र उन पर टूट पड़े। उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। बीच-बचाव करने गए सीनियरों को भी नहीं ब