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सिर्फ चिंता से हिंदी का उत्थान नहीं

7 वर्ष पहले
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विद्यार्थियों के बीच आकर बहुत खुशी का अनुभव कर रही हूं। बिहार की बेटी होने के नाते यहां के लोगों से विशेष लगाव है। सिर्फ हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी भाषा की चिंता कर लेने से ही भाषा का उत्थान नहीं हो सकता। हमें अपने व्यवहार से लगातार उपयोग से हिंदी का महत्व बढ़ाने की जरूरत है। ये बातें गोवा की राज्यपाल डॉ मृदुला सिन्हा ने कहीं। वे शनिवार को पटना काॅलेज में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित विश्व भाषा के रूप में हिंदी का बढ़ता प्रभाव विषयक सेमिनार में बोल रहीं थीं।

आधुनिक समय में विवाह के बाद टूटते रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा कि आज के समय में हर विश्वविद्यालय में विवाह पूर्ण निवारण केन्द्र खोलने की आवश्यकता है। हिंदी हृदय की भाषा है। लेकिन रोजगार की भाषा नहीं होने के कारण लोगों काे और भाषाओं का सहारा लेना होता है। हमें अपने देश को विश्व गुरु बनाने के लिए हिन्दी को भी विश्व भाषा बनाना होगा।

सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो वाई सी सिम्हाद्री ने कहा कि आज हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। दुनिया के 150 देशों में हिन्दी को पढ़ाया लिखाया जाता है, लेकिन देश में ही इसके समुचित सम्मान के अभाव में हिन्दी न्याय की भाषा, पेट की भाषा नहीं बन पाई है। प्राचार्य नवल किशोर चौधरी, प्रो. आर के वर्मा, डा.अमर कुमार सिंह, डा. सतेन्द्रु कुमार, पद्मलता ठाकुर, डा़. शिवनारायण, डा. मिथलेश, डा. तरुण कुमार ने भी अपने विचार रखे।

हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या पर बोलीं डॉ. मृदुला सिन्हा