पाप, ताप का अर्पण ही
शिव का नैवेद्य
शिव का स्वरूप शांत, सौम्य एवं शाश्वत है। ये सत्य के प्रखर अंश का प्रतिनिधित्व करते हंै। ये अर्धनारीश्वर हैं, जिनका दायां भाग पुरुष एवं बायां भाग मां अन्नपूर्णा का है। धतूरा, भांग आदि विषाक्त पदार्थ तथा बेलपत्र, बेर आदि जंगली पदार्थ ही इन्हें प्रिय हैं। इसीलिए इन पदार्थों को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने की परंपरा नहीं है।
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दैिनक भास्कर , पटना,शुक्रवार,13 फरवरी, 2015
आस्था