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अपूर्व ज्ञान का शाश्वत संदेश वाहक है उग्रतारा महोत्सव

7 वर्ष पहले
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सहरसाजिले के महिषी में तीन दिवसीय उग्रतारा महोत्सव 26, 27 28 सितंबर को होगा। इस महोत्सव में राष्ट्रीय स्तर पर कोसी-मिथिला सहित पूरे बिहार की सांस्कृतिक, बौद्धिक संपदा, विभिन्न जीवंत लोक संस्कृतियों भाषाओं की मधुरता की सशक्त अभिव्यक्ति होगी।

उग्रतारा महोत्सव समता, समरसता, समावेश अपूर्व ज्ञान का शाश्वत संदेश वाहक है और किसी तरह की संकीर्णता से परे है। 1970 में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र ने भारती मंडन स्मृति समारोह का आयोजन कराया था। उसके बाद 2012 में मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने फिर से यह आयोजन शुरू कराया। साथ ही पर्यटन विभाग के कैलेंडर में भी शामिल किया गया।

श्री उग्रतारा महोत्सव के सचिव नारायण चौधरी ने बताया कि प्राचीन काल से ही महिषी विभिन्न संस्कृतियों, समृद्ध भाषाओं और जीवन पद्धतियों का समावेशी केंद्र रहा है। आठवीं सदी में दक्षिण भारत के केरल से आदि शंकराचार्य के आगमन से यहां दो संस्कृतियों भाषाओं का महा मिलन हुआ था। देवी जैसी महान गायिका महिषी की बेटी है।

इस मौके पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। इसमें देवी समेत राष्ट्रीय स्तर के कई कलाकार भाग लेंगे। उग्रतारा न्यास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रमिल कुमार मिश्रा, वाचस्पति झा, नाथो चौधरी, जयप्रकाश राम अादि ने बताया कि अगले बजट सत्र में महोत्सव के लिए स्वीकृत राशि बढ़ाई जाएगी।