स्मार्ट सिटी का सपना और अपना पटना
आहा! अपना पटना स्मार्ट सिटी बनेगा! जलजमाव और कीचड़ से बजबजाते शहर के बाशिंदो, आज की अराजकता और ‘सबसे गंदे शहर’ का तमगा भूलकर ‘कल’ की सोचिए, उस कल की जिसका वादा है और जिसको कि एक दिन आना है, जब घर से निकलते ही सिंगापुर और सोल (दक्षिण कोरिया) जैसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था आपके स्वागत को तैयार होगी, जब आप शहर भर में 100 एमबीपीएस की ब्रॉडबैंड सेवा वाई-फाई से पाएंगे, जब बिना कट के चौबीसों घंटे बिजली मिलेगी, पीने का साफ पानी तो हर समय मिलेगा ही और सीवर एवं नाले-नालियों की ऐसी पुख्ता व्यवस्था होगी कि इंद्र का कोप भी यहां जलजमाव नहीं करा पाएगा। फिलहाल खुश होने के लिए इतना काफी है वर्ना तो स्मार्ट सिटी में और भी बहुत कुछ चमत्कारी होने वाला है।
आपका अब तक का अनुभव इसे ‘प्यारा मज़ाक’ ही मानेगा लेकिन अगर दुनिया में इस तरह के शहर हैं तो अपने यहां क्यों नहीं हो सकते, जबकि अच्छे दिनों की उम्मीदें जगाने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी का यह सपना भी हो। हमारे नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी जी तो इस ख्वाब से इतने उत्साहित लगते हैं कि पटना के साथ गया और भागलपुर ही नहीं, 11 और नगर निगमों को भी स्मार्ट सिटी योजना में शामिल करवाना चाहते हैं। जब कायाकल्प ही होना है तो उसमें हमारे ज़्यादा से ज़्यादा नगर क्यों शामिल कराए जाएं!
बात सचमुच तब मज़ाक ही हो जाती है जब अपने ही मंत्री जी यह कह देते हैं कि स्मार्ट सिटी योजना के लिए पीपीपी मोड की अनिवार्यता खत्म कर देनी चाहिए क्योंकि बिहार में तो कोई प्राइवेट पार्टी किसी शहर में स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए भारी निवेश करेगी नहीं। यह पीपीपी मोड भी अज़ब बला है। इसमें प्राइवेट कंपनियां सरकार से अनुबंध करके उसकी शर्तों के मुताबिक परियोजनाओं (यहां स्मार्ट सिटी) का विकास करती हैं। इसमें बहुत बड़ी पूंजी लगानी पड़ती है जिसमें खतरे कम नहीं होते, लेकिन कंपनी को मुनाफे की संभावनाएं भी अपार होती हैं। मंत्री जी की चिंता बिल्कुल वाज़िब है कि बिहार में इतने भारी पैमाने पर पूंजी निवेश करने वाला मिलेगा कहां। यहां तो कायदे की सड़क बनाने के लिए भी स्तरीय ठेकेदार नहीं मिलते, बकौल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकार। खैर, बदलते बिहार में कभी कोई कलेज़े वाली बड़ी पार्टी पीपीपी के लिए तैयार हो भी गई और पटना स्मार्ट सिटी बन गया तो स्वप्न सी लग रही सुविधाओं क