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एशियाड में अजीत श्रेयसी पर रहेंगी बिहार की निगाहें
क्याकिंग केनोइंग स्पर्द्धा में पदक के लिए मैदान में होंगे सीतामढ़ी के अजीत, तो शूटिंग में बांका की श्रेयसी
बिहारके लाल अजीत इन दिनों भोपाल में रहकर जमकर मेहनत कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि एशियाड में इस बार उन्हें पदक मिलेगा ही। अजीत क्याकिंग एवं केनोइंग स्पर्द्धा के केनो स्प्रिंट कैटेगरी में हिस्सा लेंगे। बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुपति प्रखंड के रमनगरा गांव का रहने वाले अजीत कुमार साह सर्विसेज की ओर से खेलते हैं और फिलहाल रुड़की में आर्मी में पदस्थापित हैं। अजीत कुमार साह को 2008 में स्पोर्ट्स कोटे पर आर्मी में नौकरी मिली थी। उनका शुरू से स्पोर्ट्स में लगाव था। वह शुरू से इस खेल में नहीं थे, पर आर्मी में भर्ती के बाद उनकी शारीरिक बनावट को देखते हुए क्याकिंग और केनोइंग खेल के लिए चुना गया। शुरू में काफी दिक्कतें हुईं पर अजीत ने काफी मेहनत की और एक साल बाद उन्हें सफलता मिल गई। सी-टू कैटेगरी में हिस्सा लेने वाले अजीत ने एक साल बाद सीनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीता और इसके बाद उसने कभी मुड़ कर नहीं देखा।
पटना| राष्ट्रमंडलखेलों में रजत पदक जीतने के बाद श्रेयसी ने एशियाड के लिए जोरदार तैयारी की है। दक्षिण कोरिया के इंचियोन जाने के पूर्व उनका एक महीने का समय इटली में बीता है। श्रेयसी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व दिग्विजय सिंह और बांका की पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी हैं। राष्ट्रमंडल खेल के व्यक्तिगत स्पर्द्धा में पदक जीतनेवाली वह बिहार की संभवत: पहली खिलाड़ी बनी थीं। राज्य के खेलप्रेमी श्रेयसी से लगातार दूसरी बार पदक जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। राज्य सरकार की नजर भी श्रेयसी पर है। राष्ट्रमंडल में पदक जीतने के बाद बिहार सरकार ने श्रेयसी को 11 लाख रुपए से सम्मानित करने की घोषणा की है। वह एशियाड में भी सफल होती हैं, तो राज्य सरकार इनामी राशि बढ़ा सकती है।
इटली की तैयारी काम आएगी श्रेयसी को
दक्षिण कोरिया के इंचियोन में होने वाले एशियाड के लिए तीन महीने से अजीत टीम के अन्य सदस्यों के साथ भोपाल में ट्रेनिंग ले रहे हैं। रोजाना 30-35 किलोमीटर तक नाव चलाते हैं। वे सी-टू इवेंट में शिरकत करेंगे। इसमें 1000 मीटर की दूरी तय करनी होती है।
पिछली बार नहीं मिली थी सफलता
अजीत ने वर्ष 2010 में हुए एशियाड में हिस्सा लिया था। उसमें सातवां स्थान मिला था। इसके अलावा अब तक अंतरराष