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सरकारी कर्मी राजनेता करें प्रयास तो बढ़ेगी हिंदी
हिंदी को ऊर्जा संचार की जरूरत, बढ़ेगी इसी से
भागवतशरण झा \\\"अनिमेष\\\', आयकर अधिकारी (ओएसडी)
नईसहस्त्राब्दी में हिंदी नई चुनौतियों से जूझ रही है। हिंदी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीकी क्रांति के प्रति इसका क्या नजरिया है। हिंदी पखवाड़ा के दौरान हिंदी को नवीन वैज्ञानिक लेखन से लैस करना होगा। इसके लिए हिंदी को नवीन संस्थाओं, नए कार्यकर्ताओं और युवा मस्तिष्क की आवश्यकता है। इस पर विचार करना होगा कि कंप्यूटर, मोबाइल फोन, फेसबुक या ट्विटर पर हिंदी के प्रयोग को कैसे बढ़ाया जाए। भाषाई मुद्दे पर यूपीएससी के परीक्षार्थियों का बवाल इस ओर ध्यान दिलाता है कि हिंदी में जबरदस्ती गढ़ी गई शब्दावली से बचने की जरूरत है। यह भाषा सर्वाधिक उपेक्षित हिंदी पट्टी में है। यदि घर में ही सहारा नहीं मिलेगा, तो बाहर कैसे हिंदी बढ़ेगी। इसे बढ़ाना है तो हिंदी को नारे का नहीं, बल्कि स्वाभिमान का विषय बनाना होगा। बाजार, व्यापार और व्यवहार की भाषा बनने के लिए हिंदी प्रयासरत भी है और धीरे-धीरे सफल भी हो रही है। हिंदी को आगे बढ़ाने में सरकारी कर्मियों को अपने स्तर से योगदान देना होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के ताजा आदेश से मिलेगी गति
गुड्डूकुमार सिंह, सिविल सेवा परीक्षा विशेषज्ञ
राजभाषाके संदर्भ में यह संवैधानिक आदेश है कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके.....। भारत सरकार का शासन राजभाषा का ऐसा विकास कर सका है अथवा नहीं, यह विचारने की बात है। हिंदी में शब्दगत आधार पर तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशज शब्दों का प्रयोग हो रहा है। भाषिक प्रयोग की यह विशिष्टता निंदनीय नहीं, प्रशंसनीय है। है। प्रसन्नता इस बात की है कि अब राजभाषा विभाग ने प्रशासनिक हिंदी को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह आदेश जारी कर दिया है कि सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाए। जब जनता को समझ में आने वाली सरल हिंदी में मूल टिप्पण लिखा जाएगा, अंग्रेजी के टिप्पण का हिंदी में अनुवाद नहीं किया जाएगा तो यही हिंदी दौड़ेगी। गतिमान होगी। प्रवाहशील होगी।
भारतीय रेल ने कायम की मिसाल, अन्य भी करें ऐसा
सिद्धेश्वर,वरीय टिकट परीक्षक, पटना जंक्शन, पूर्व मध्