न्यायपालिका v/sकार्यपालिका
यह तो कोर्ट की अवमानना और अपमान है...
विधि विशेषज्ञ बोले
सूबे में पहली बार मामूली आरोपों में ऐसी कार्रवाई हुई
आईएएस भड़के
शीर्षत कपिल को मिल सकता है आयुक्त का प्रभार
अवैध भवनों पर कार्रवाई की सजा मिली : कुलदीप
रात तक रही गहमागहमी
नगर आयुक्त को सस्पेंड कर हाईकोर्ट से टकराई सरकार
भूमाफिया बिल्डरों के आगे सरकार नतमस्तक : मोदी
विपक्ष ने भी घेरा
लोकतंत्रके दो ध्रुव आमने-सामने गए हैं। हाईकोर्ट की रोक के बावजूद सरकार ने पटना नगर निगम के आयुक्त कुलदीप नारायण को शुक्रवार को निलंबित कर दिया। उन पर काम में कोताही और अकर्मण्यता का आरोप लगाया। दिन में मुख्यमंत्री ने इसे मंजूरी दी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा-सरकार ऐसा कैसे कर सकती है। यह तो कोर्ट से सीधा टकराव है। इस टिप्पणी के बाद भी सरकार ने शाम को निलंबन की अधिसूचना जारी कर दी। के सेंथिल कुमार के बाद कुलदीप नारायण दूसरे निगमायुक्त हैं, जिन्हें निलंबित किया गया है। हालांकि सेंथिल को भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किया गया था।
सरकारका तर्क
नगरविकास विभाग ने 11 नवम्बर को निगमायुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर पांच बिन्दुओं पर जवाब तलब किया था। इसमें फॉगिंग मशीन खरीदने, कचरा प्रबंधन ठीक ढंग से करने, राजधानी में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में असफल रहने और सफाई में कोताही बरतने का आरोप था। अपने जवाब में निगमायुक्त ने पटना नगर निगम के गतिरोध के पीछे वहां की राजनीति को दोषी ठहराया था। साथ ही राशि खर्च नहीं करने की बात स्वीकार की थी। निगमायुक्त के जवाब को असंतोषजनक करार देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने उनको निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
हाईकोर्टमें सुनवाई सोमवार को
दोपहरमें निगम के वकील ने हाईकोर्ट को निलंबन की जानकारी दी। इस पर जस्टिस वीएन सिन्हा और जस्टिस पीके झा की खंडपीठ ने कहा-स्टे के बावजूद कोर्ट से बिना अनुमति लिए सरकार ऐसा कैसे कर सकती है। यह तो कोर्ट से सीधा टकराव है। कोर्ट ने वकील और अपर महाधिवक्ता राय शिवाजी नाथ से पूछा-नोटिफिकेशन कहां है। निगम के वकील ने कहा-अभी नहीं मिला है। कोर्ट ने कहा-सोमवार को पूरी तैयारी से आइए।
दोपहर 1.05 बजे
निलंबनकी सूचना निगम में पहुंची।
दोपहर2.15 बजे
हाईकोर्टसे निलंबन पर रोक लगाने की मांग। क