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एससी-एसटी थाने बनेंगे चेतना केंद्र देंगे विकास योजनाओं की जानकारी
बिहारमें एक नया प्रयोग शुरू होने वाला है। थानों से अब अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों को सरकार की विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इतना ही नहीं थाना-थाना नहीं कहा जाएगा। उसे अब चेतना केन्द्र का नाम दिया जाएगा। हालांकि बिहार में इसका प्रयोग फिलहाल एससी-एसटी थानों से होगा। राज्य में 40 एससी-एसटी थाने हैं। एडीजी (कमजोर वर्ग) अरविंद पाण्डेय के अनुसार इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है। थाना आने वाले पीड़ितों को एससी-एसटी से जुड़ी राज्य सरकार की विकास योजनाओं के बारे में तो बताया ही जाएगा, उन्हें एससी-एसटी से जुड़े कानून के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। शुक्रवार को पटना और मुजफ्फरपुर जोन के एससी-एसटी थानाध्यक्षों की बैठक में अफसरों को इस पर अमल करने का निर्देश दिया गया है। थाना के बाहर संबंधित थाना के नाम से चेतना केन्द्र का बोर्ड भी लगेगा। खासबात यह भी है कि थानेदार जमीन विवाद के मामलों को भी सुलझाने की कोशिश करेंगे। इसके पीछे का मकसद यह है कि अगर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग और सामान्य वर्ग के लोगों के बीच जमीन विवाद हो तो आगे चलकर वह विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या का रूप धारण कर ले। थानेदार दोनों पक्षों से बातचीत करेंगे।
एससी-एसटी थानों में 45 की उम्र पार थानेदार नहीं होंगे
राज्यके एससी-एसटी थानों में उन्हीं थानेदारों की पोस्टिंग होनी है, जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम हो। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खुद यह निर्देश दिया है। शुक्रवार को समीक्षा के दौरान पाया गया कि बक्सर, छपरा, बेतिया और गोपालगंज के एससी-एसटी थानों में जिन थानेदारों की पोस्टिंग की गई है, उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है। एडीजी (कमजोर वर्ग) ने इन थानेदारों को बदलने का निर्देश दिया है।