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विश्व बैंक की मदद से बनेगा जलमार्ग

6 वर्ष पहले
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गंगाजल मार्ग से ट्रांसपोर्टिंग शुरू होने से समीप के इलाकों के कारोबार को बल मिलेगा। इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांधी सेतु पर वाहनों का दबाव घटेगा। विश्व बैंक के सहयोग से इस कार्य योजना पर शीघ्र कार्य शुरू होगा। इस योजना को चार साल में इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले दिनों आईडब्ल्यू आई ( इनलैंड वाटरवेज आथॉरिटी ऑफ इंडिया) परिवहन विभाग के प्रधान सचिव शशिशेखर शर्मा के साथ विश्व बैक के अधिकारियों के साथ गायघाट स्थित निनि में हुई बैठक आसार बढ़ गए हैं।

चारसाल में पूरा होगा काम

विश्वबैंक की मदद से शुरू होने वाले इस योजना 4200 करोड़ खर्च होगा। कार्य के पूरा होने में चार साल का वक्त निर्धारित किया गया है। आइडब्लूयआई के अध्यक्ष अमिताभ वर्मा कहना है कि योजना के तहत नदी परिवहन संरक्षण,आधुनिक सूचना प्रणाली,डिजिटल जीपीएस सहित अन्य आधुनिक प्रणाली पर कार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार हल्दिया से इलाहाबाद के बीच राष्ट्रीय जलमार्ग को सुगम परिवहन के लिए वाराणसी,व गाजीपुर पश्चिम बंगाल के कटवा में वाटर टर्मिनल का निर्माण पूरा किया जाएगा। योजना के तहत फरक्का में नया बराज भी बनेगा।

गायघाट के पास लगे जहाज।

राष्ट्रीय जल मार्ग-1 को व्यापार के लिए सुगम सस्ता बनाएं जाने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके प्रथम चरण में हल्दिया से इलाहाबाद के बीच मार्ग को विकसित किया जाएगा। जल परिवहन मार्ग के लिए जरूरी आधारभूत संरचना,तकनीकी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पिछले दिनों गायघाट स्थित राष्ट्रीय अंतरदेशीय नौवहन संस्थान में इस मुद्दे पर वरीय अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। इसके बाद इस कार्य योजना को शुरू भी कर दिया गया है। इस योजना से व्यापार को नई राह जबकि रोजगार की संभावना भी बढ़ेगी।