सामाजिक व्यवस्था पर किरदारों का कटाक्ष
राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर हमरी बिलैया हमरे से म्याउं का प्रदर्शन
राज्यके मौजूदा राजनीतिक हालात को दर्शाते हुए संपूर्ण कल्याण विकास समिति की ओर से रविवार को डाकबंगला पर नुक्कड़ नाटक हमरी बिलैया हमरे से म्याउं का प्रदर्शन किया।
बिहार में चल रहे राजनीतिक उठा पटक से दर्शकों को आगाह किया गया। बताया गया कि सब कुर्सी का खेल है। जनता की परवाह किसी दल को नहीं। नाटक को इंद्रजीत गोस्वामी ने लिखा और ज्ञानी प्रसाद ने निर्देशित किया। नाटक में मिथिलेश कुमार, विजय कुमार सिन्हा, संजीत गुप्ता, गोलू कुमार, अनिल मंडल, सुनील चौधरी, चंद्रदेव प्रसाद, देवानंद, सागर, प्रशांत आदि ने अभिनय किया।
सूत्रधार का नुक्कड़ नाट्य महोत्सव
कविवर पुरुषार्थी मंच का भ्रष्टाचार मुर्दाबाद
लेखकनिर्देशक : अनिल कुमार सुमन
अभिनय : प्रेमलता श्रीवास्तव, रंजीत कुमार, लालदेव यादव, मुन्ना आदि।
विश्वा पटना का हवालात
लेखक: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
निर्देशक : संजना
अभिनय : राजनंदन, शेखर, सूर्यप्रकाश, जहांगीर, राजेश, नरेंद्र आदि
नुक्कड़ नाटक हमरी बिलैया हमरे से म्याऊं का प्रदर्शन करते कलाकार।
पटना रंगमंच का पालकी पालना
लेखक: विनोद रस्तोगी
निर्देशक : सुरेश कुमार हज्जु
अभिनय : सुदर्शन शर्मा, आरती, आशीष, रितेश, मनीषा, सोनाली, सुष्मिता, शिव, गोपी आदि
सिटी रिपोर्टर|खगौल
बलात्कारपीड़िता का पिता फूट-फूट कर रो रहा है। उसकी आंखों से निकले वाले आंसू सुख चुके हैं। बेटी की चिता जला रहे पिता के चेहरे पर उभरा दर्द दिलों को झकझोर रहा है। यह नजारा था खगौल में सूत्रधार के नुक्कड़ नाट्य समारोह में रविवार को छपरा की रंग संस्था आशा की प्रस्तुति उक्का बुक्का का। नाटक में दिखाया गया कि सामूहिक बलात्कार से पीड़ित लड़की का पिता न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाते थक गया था। लेकिन उसे कहीं न्याय नहीं मिला। सरकार, मीडिया, राजनेता सभी अपने मतलब के हिसाब से आवाज तो उठाते हैं। लेकिन न्याय दिलाने के लिए कोई आगे नहीं आता। जहांगीर द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक में लंबी न्यायिक प्रक्रियाएं, संवेदनशील मामलों का राजनीतिकरण, समाज के उदासीन रवैये को दर्शकों के सामने रखा गया। नाटक में नीतीश कुमार, रणधीर कुमार, राहुल कुमार, सुधांशु, सूर्यनारायण, श्रवण आदि ने अभिनय किया।