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6 वर्ष पहले
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बीएनएमयू के छात्र परेशान

बीएनएमयूबिहार के विश्वविद्यालयों में एक है, यहां की विधि व्यवस्था काफी खराब है। यहां ज्यादातर गरीब छात्र ही नामांकन कराते हैं, क्योंकि यहां कोर्स पूरा करने में चार-पांच साल लगते हैं। यहां कॉलेजों की हालत भी खराब है। तो शिक्षक ही आते हैं, ही छात्र आते हैं। पिछले साल प्रभारी कुलपति द्वारा गरीब छात्रों के लिए गृह जिले में ही परीक्षा केन्द्रों की व्यवस्था की गई, लेकिन नए कुलपति ने फिर दूसरे जिले में परीक्षा लेना शुरू कर दिया, जिससे परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पर रहा है।

-ईश्वर कुमार, बनगांव, सहरसा।

शिक्षा का बाजारीकरण

आजजिस तरह से शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है, वह घातक है। यदि कोई छात्र मैट्रिक की परीक्षा देकर पटना पढ़ने के लिए आता है, तो उसे चाहते हुए भी इंजीनियरिंग या मेडिकल की तैयारी करनी पड़ती है। इसके लिए छात्रों की रुचि हो या हो। इस फ़ैसले के पीछे अभिभावक का भी हाथ होता है। कोचिंग संस्थानों द्वारा लुभावने वादे किए जाते हैं। न्यूज चैनल्स पर भी उनके विज्ञापन दिखाए जाते है, जिससेे बहुत छात्र प्रभावित भी हो जाते हैं, पर बाद में रिजल्ट नहीं पाता है।

-कुमारचंद्रमणि झा, पटना कालेज

स्कूली शिक्षा में सुधार हो

शिक्षाजगत की बड़ी अजीब स्थिति हो रही है। अधिक से अधिक बच्चे विद्यालय से जुड़कर अच्छी तरह शिक्षा ग्रहण कर सकें, इसके लिए सरकार ने तरह- तरह की योजनाएं चला रखी हैं। योजनाओं से बहुत से बच्चों का भला होता है, किन्तु यह भी देखा जाता है कि योजनाओं का लाभ लेने तक बच्चे विद्यालय में उपस्थिति बनाए रखते हैं और लाभ लेने के बाद बच्चे विद्यालय से अनुपस्थित हो जाते हैं।

-मिथिलेश कुमार, बलुआचक, भागलपुर