पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सतीश सिंह, कवि, पटना

सतीश सिंह, कवि, पटना

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सतीश सिंह, कवि, पटना

याद

वैशाख की दोपहर में

इस तरह कभी छांव नहीं आता

प्यासी धरती की प्यास बुझाने

ही आते हैं

इस तरह

शीतल फुहारों के साथ मेघ

इस तरह

श्मशान में शांति भी नहीं आती

मौत का नंगा तांडव करते

इस तरह

अचानक!

शरद में शीतलहरी भी नहीं आती

कलेजा चाक कर दे इंसान का

हमेशा के लिए

ऐसा ज़लज़ला भी नहीं आता

इस तरह चुपचाप

जिस तरह

आती है तुम्हारी याद

उस तरह, कुछ भी नहीं आता।