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सभी निजी बीएड कॉलेजों पर होगा सरकार का नियंत्रण

6 वर्ष पहले
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राज्यके निजी बीएड कॉलेजों पर भी राज्य सरकार का नियंत्रण होगा। इसके लिए एक्ट बनेगा। इसका प्रस्ताव शिक्षा विभाग बना रहा है। जल्द विधि विभाग की सहमति ली जाएगी। इससे बीएड कॉलेजों में मनमानी फीस पर अंकुश लगेगी। कॉलेजों की आधारभूत संरचना और वहां दी जा रही ट्रेनिंग की गुणवत्ता की भी जांच की जा सकेगी।

अभी निजी बीएड कॉलेजों पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। ये डेढ़ लाख रुपए तक फीस लेते हैं। सरकार के पास फीस जांचने का प्रावधान नहीं है। एक्ट बनने से सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वे कॉलेजों के मनमाने और अनुचित रवैए पर अंकुश लगा सके। सरकारी बीएड कॉलेज की फीस 12500 रुपए है। एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए फीस 4500 है।

दो साल के बीएड पर दी सहमति

2015में शुरू होने वाले सत्र से बीएड कोर्स एक की जगह दो साल के होंगे। एनसीटीई के इस फैसले पर शिक्षा विभाग और राज्य के बीएड कॉलेजों ने अपनी सहमति भेज दी है।

बिहार के विभिन्न जिलों में 190 से अधिक निजी बीएड कॉलेज हैं। वहीं, सरकारी बीएड कॉलेजों की संख्या मात्र छह है, जिनमें एक अभी बंद है। जिन पांच सरकारी बीएड कॉलेज में पढ़ाई हो रही है, उनमें छपरा, समस्तीपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और सहरसा शामिल है। गया बीएड कॉलेज चालू करने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है जल्द एनसीटीई से इसे संचालित करने की मान्यता मिल जाएगी।