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पुलिस भांज रही हवा में हाथ

6 वर्ष पहले
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पटना के ऐतिहासिक स्थल

चोर बेच रहे भगवान

कलियुग के विस्तार भटयुग में शायद यही बचा था, जो हो रहा है। चोर, राम-सीता; राधा-कृष्ण; दुर्गा; शंकर; विष्णु; हनुमान; बुद्ध; महावीर …, किसी को नहीं छोड़ रहे। उनकी प्राचीन मूर्तियां चुराकर बेच दे रहे हैं। इधर मूर्ति चोरी का नया रिकॉर्ड बना है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इनकी खासी कीमत मिलती है। धरोहर में शामिल तमाम चीजें (पांडुलिपि, पेंटिंग, ग्रंथ आदि) तस्करों के हाथों विदेशों में पहुंच रही हैं। चूंकि बिहार में मूर्तियों के अलावा ये सारी चीजें बड़ी मात्रा में और बहुत सहजता से उपलब्ध हैं, सुरक्षा की लायक व्यवस्था नहीं है, लिहाजा प्रदेश इस अनैतिक कारोबार का निहायत सुरक्षित स्रोत या अड्‌डा बना हुआ है। घरोहरों के प्रति जानकारी और जागरूकता का अभाव भी चोरों-तस्करों को ताकत दिए हुए है।

40साल पहले की चोरी से नसीहत नहीं : आठजनवरी 1974 को चोरों ने गोपाल नारायण पब्लिक लाइब्रेरी (भरतपुरा, पालीगंज) से बेशकीमती पांडुलिपियां चुरा लीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा।

तीन पांडुलिपि बरामद हुई। एक \\\'मुता-उल-हिन्द\\\' के बारे में पता चला कि वह कैलिफोर्निया पहुंचा दिया गया। जो बहुमूल्य थाती यहां है, आज भी उसकी लायक सुरक्षा है?

मधुरेश | पटना

इलेस्ट्रेशन : रितेश

मूर्ति चोरी के बाद बंद हुआ संग्रहालय

रमणकुमार ठाकुर, सहरसा |सिवाय महिषी उग्रतारा स्थान के कहीं भी मूर्तियों की सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। उग्रतारा स्थान में सुरक्षा चौकी है। इसी के पास आठवीं सदी के कंदाहा सूर्य मंदिर सहित चंडी स्थान विराटपुर, महेश्वरधाम शिव मंदिर, नकुलेश्वर मंदिर वाणेश्वर महादेव मंदिर की मूर्तियां शायद इसी भरोसे में हैं कि भला भगवान को कौन चुरा सकता है? कुछ साल पहले सहरसा के कारू खिरहरि संग्रहालय से बुद्ध की बेशकीमती मूर्ति चोरी चली गई। यहां पुलिस चौकी बनी। तब से संग्रहालय बंद है। विराटपुर स्थित चंडी स्थान से भी मूर्ति चुराने का प्रयास हुआ।

बलिराजगढ़ : लावारिस है धरोहर

डॉ.आशुतोष सिन्हा, मधुबनी |बाबूबरही प्रखंड में है बलिराजगढ़। यहां से पालकालीन भवनों की संरचना, अवशेष, ईंटें अन्य वस्तुएं मिल चुकी हैं। कई कूप मिले हैं। 60 एकड़ में फैले इस धरोहर प्रक्षेत्र की सुरक्षा के लिए कहने को सुरक्षाकर्मी हैं, पर यहां कोई रहता नहीं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय की शाखा में कोई आदमी नहीं मिलता। पूरा क्षेत्र लावारिस सा है। कंटीले तार के बाड़ कई जगह से टूट चुके हैं। कई बार खुदाई शुरू हुई लेकिन यह पूरी नहीं हुई। स्थानीय लोग कहते हैं-यह स्थल शापग्रस्त है। जब खुदाई होती है तो इस काम में लगे मजदूर या अफसर की मौत हो जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा तो होता है लेकिन

वायानेपाल-बांग्लादेश पूरी दुनिया …, घरोहरों को चुराने-बेचने वालों का नेटवर्क अक्सर खुले में आता है। लेकिन सबकुछ रूटीन कार्रवाई तक सिमट जाता है। भागलपुर में अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के ग्यारह मूर्ति चोर पकड़े गए थे। गिरोह ने थाईलैंड और बांग्लादेश का अपना संजाल बताया। पुलिस या कोई एजेंसी वहां तक पहुंची? क्यों नहीं पहुंची? सीमावर्ती तथा उन क्षेत्रों में ऐसी चोरियां ज्यादा होती हैं, जहां सबकुछ बिल्कुल खुले में है। यानी इलाके भी घोषित हैं। लेकिन ऐसा ठोस उपाय नहीं है कि जो इस घिनौने कारोबार को कारगर तरीके से रोकने में सहायक हो।

पटना म्यूजियम से ही मूर्तियां ले गए चोर

म्यूजियमके एक बड़े कमरे में बौद्ध धर्म से जुड़ी मूर्तियां 24 सितंबर 2006 की शाम तक थीं। एक दिन की छुट्‌टी के बाद जब म्यूजियम खुला तो मूर्तियां नहीं थीं। बगल में कोतवाली थाना। हड़कंप। हां, सीबीआई ने चोरों को पकड़ लिया। मूर्तियां मिल गईं। अच्छा संयोग था। 2003 में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि और मिथिला शोध संस्थान से चोरी गई दुर्लभ पांडुलिपियों नहीं मिलीं। ऐसे मामलों में पुलिस कुछ दिन हाथ-पैर मारने के बाद शांत हो जाती है।

बोधगयासे बुद्ध की मूर्ति चुरा ले गए न्यूयार्क

बोधगयाके शंकराचार्य मठ से कुछ साल पहले बुद्ध की एक मूर्ति चोरी हो गई। वह बाद में न्यूयॉर्क के मेट्रोपोलिटन म्यूजियम में दिखी। भारत सरकार के मशक्कत के बाद इसकी वापसी हुई। यहां बौद्धकालीन कई बेशकीमती मूर्तियां अब भी उपेक्षित, असुरक्षित हैं। ये फिर दूसरे देशों में दिखने लगे, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

अस्तित्वका औचित्य?

सौसाल से ज्यादा का हो चुका बिहार रिसर्च सोसायटी अपने अस्तित्व की बस औपचारिकता निभा रहा है। राहुल सांस्कृत्यायन ने जो थाती इसे सौंपी थी, क्या उसका भी समय पर लायक संरक्षण-संवर्द्धन हुआ?

चोरी की कुछ हालिया वारदातें

10फरवरी 2015 सरथुआ(मखदुमपुर) ठाकुरबाड़ी से राधा-कृष्ण की मूर्ति चोरी।

4फरवरी नूरसराय(नालंदा) चार प्राचीन मूर्तियां गायब।

-प्राचीनतम मुंडेश्वरी भवानी की आंख और छतरी चोरी हो गई।

27जनवरी पुरनहिया(शिवहर) के रामजानकी मठ से अष्टधातु की मूर्ति चोरी।

19जनवरी मुशहरी(मुजफ्फरपुर) से अष्टधातु की मूर्ति की चोरी।

22दिसंबर 2014 नबाबगंजठाकुरबाड़ी (कटिहार) से राधाकृष्ण छह मूर्तियां चोरी।

20दिसंबर आलमगंज(पटना सिटी) के बांके बिहारी मंदिर से मूर्तियां चोरी।

{कुछ दिन पहले पटना में धर्मशाला गली स्थित गोवर्धननाथ मंदिर से चाणक्य की मूर्ति, हीरानंद गली से हनुमान मूर्ति। दीरा पर स्थित प्राचीन काली मंदिर से मूर्तियां चोरी हुईं।

(नोट :- बड़ी लंबी सूची है।).

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते लगातार यह बात कही है कि \\\'बिहार का इतिहास, मानव सभ्यता का इतिहास है।\\\' बेशक, इससे जुड़े तर्क और तथ्यों की कमी नहीं है। सत्ता शीर्ष के कमोबेश इसी मनोभाव पर अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय भी बन रहा है। यह सब अपने इतिहास का बोध, उस पर गौरव और उसे लोगों के लिए प्रेरणा का चरम बिंदु बनाने का तारीफ लायक प्रयास कहा जा सकता है। लेकिन इसका दूसरा पक्ष बड़ा भयावह है। यह धरोहरों के संरक्षण-संवर्द्धन का मोर्चा है। यहां सरकार फेल है। बहुत कुछ यूं ही पसरा, फैला और बिल्कुल खुले में है। चोरों-तस्करों को आमंत्रित करता। इसलिए धरोहर, चाहे वे प्राचीन मूर्तियां हों या पांडुलिपियां …, इनकी चोरी-तस्करी का लगातार नया रिकॉर्ड बन रहा है। हम अपने नेटवर्क के बूते हालात को पेश कर रहे हैं। देखिए ….

पटना में पैलेस ऑफ अशोक, बुलंदीबाग, छोटी पहाड़ी के स्तूप, पंचपहरी के स्तूप, प्राचीन मौर्य द्वारा बनाए गए लकड़ी के फाउंडेशन के अवशेष, मीर अशरफ जामा मस्जिद, शाह दौलत और इब्राहिम खान का मकबरा, मनेर का प्राचीन टीला आदि ऐतिहासिक स्थल हैं।

{2011 से ही बिहार में बंद हैं उत्खनन केंद्र

71 साइटों को संरक्षित कर रहा एएसआई पटना अंचल

देवांशु नारायण | पटना

भारतीयपुरातत्व सर्वेक्षण ( एएसआई) पटना अंचल के अंतर्गत बिहार में 71 पुरातत्व साइट हैं। एएसआई पटना अंचल के अधीक्षण पुरातत्वविद् हेमसागर नायक के मुताबिक केंद्र सरकार के एक आदेश के बाद 2011 से ही देश के हर हिस्से में उत्खनन कार्य पर रोक लगा दी गई है। 2011 तक बिहार के बलिराजगढ़ में खोदाई हुई थी। जिसे इस आदेश के बाद रोक दिया गया था। मधुबनी अमुमंडल से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलिराजगढ़ का क्षेत्रफल 175 एकड़ का है। उत्खनन के दौरान यहां मिलीं ईंट की चौड़ाई एक से डेढ़ फीट तक बताई जाती है और मोटाई चार इंच तक है।

{आचार्य किशोर कुणाल की राय

कब्रिस्तानों की तरह हो मंदिरों, मठों की चहारदिवारी : कुणाल

आलोक कुमार | पटना

मठ-मंदिरोंसे प्राचीन मूर्तियों की चोरी रोकने के लिए कब्रिस्तानों की तरह मठ-मंदिरों की भी घेराबंदी कराई जानी चाहिए। मूर्ति चोरी के महज पांच फीसदी मामलों का ही खुलासा हो पाता है। न्यास बोर्ड चाह कर भी मठ, मंदिरों से मूर्तियों की चोरी नहीं रोक पा रहा है। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री थे तब मठ-मंदिरों की चहारदिवारी की स्कीम पर बात हुई थी। कुमार ने सकारात्मक रूख भी दिखाया था। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। अब फिर से इस दिशा में प्रयास तेज किया जाएगा। बिहार में अभी भी आधा दर्जन से अधिक मंदिर ऐसे हैं, जहां करोड़ों की संपत्ति है। सरकार की ओर से वहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। जब राज्य में अपराध का ग्राफ ऊपर था तब चोर मंदिरों की ओर रुख कम करते थे। जब अपराध में कमी आई तो फिर मंदिरों में चोरियां बढ़ गईं। चोर ज्यादातर अष्टधातु की मूर्तियों की चोरी करते हैं। संगमरमर की नहीं।

{गिरोह का लंबा चौड़ा है नेटवर्क

जांच मुमकिन नहीं, सीआईडी को मिलेगा जिम्मा : एडीजी

अतुल उपाध्याय | पटना

एडीजी(मुख्यालय) गुप्तेश्वर पांडेय मानते हैं कि मूर्ति या धरोहरों की चोरी की जांच का पुलिसिया तरीका अभी मुनासिब नहीं है। चूंकि ऐसे गिरोहों का लंबा-चौड़ा नेटवर्क है और पुलिस अपने इलाके तक सीमित रह जाती है। इससे गिरोह को फायदा मिल जाता है। उन्होंने कहा-ऐसे मामलों की जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा जाएगा। उससे पिछले दस साल के दौरान हुई बड़ी चोरियों को खंगालने को कहा जाएगा। पांडेय को उम्मीद रही कि यह तरीका फायदेमंद रहेगा। उनके अनुसार चोरी के अधिकांश मामले अंतर जिला या अंतरराज्यीय होते हैं। कई में तो गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े होते हैं। पुलिस को भी इसी अंदाज में कार्रवाई करनी होगी। ऐसी चोरियां अकेले बिहार में नहीं हो रहीं हैं। गिरोह के खिलाफ पुलिस को भी समानांतर नेटवर्क खड़ा करना पड़ेगा। बिहार पुलिस इस बारे में अपने स्तर से प्रयास करेगी।