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साधना, धैर्य और विनम्रता से बदला जा सकता है भाग्य
पटना|कोई भीव्यक्ति साधना, धैर्य और विनम्रता से अपना भाग्य बदल सकता है। इसके जीवंत उदाहरण डॉ. शिववंश पांडेय को कहा जा सकता है। यह बात बुधवार को जाकिर हुसैन संस्थान में डॉ. पांडेय की 84वीं जयंती पर हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. शशि शेखर तिवारी ने कहा कि जब तक मानव जाति संसार में अपने शाश्वत भावों का अभियान जारी रखेगी, साहित्य कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने डॉ. पांडेय के बारे में बताया कि वह मानव-मन को उत्साह देने वालों में से रहे हैं। कार्यक्रम में सम्मेलन के प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव, राजेंद्र साहित्य परिषद के प्रधान सचिव बलभद्र कल्याण, सम्मेलन के उपाध्यक्ष पं शिवदत्त मिश्र, मृत्यंजय मिश्र ‘करुणेश’, राजीव कुमार सिंह ‘परिमलेन्दू’, डॉ. नरेश पांडेय चकोर, डॉ. भगवान सिंह भास्कर, आचार्य पांचु राम, अधिवक्ता पंडित जी पांडेय, प्रो. अरुण कुमार प्रसाद सिन्हा, डॉ. बीएन विश्वकर्मा, विष्णु पांडेय, प्रभाकर, गणेश झा, धनंजय श्रोत्रिय, कृष्ण कन्हैया, कवि राज कुमार प्रेमी, वशिष्ठ तिवारी, अजय कुमार, आर प्रवेश, कृष्ण मोहन मिश्र तथा आनंद मोहन झा आदि उपस्थित थे।