यह अजब युद्ध है, नहीं किसी की भी जय
नाटक में दिखी देवन मिसिर की बुद्धिमानी
यहअजब युद्ध है नहीं किसी की भी जय
दोनों पक्षों को खोना ही खोना है
अंधों से शोभित था युग का सिंहासन
दोनों ही पक्षों में विवेक ही हारा...
इनपंक्तियोंसे महाभारत युद्ध की विभीषिका को बुधवार को कालिदास रंगालय में दिखाया गया। मौका था यहां डॉ चतुर्भुज की स्मृति में शुरु हुए छठे अखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्योत्सव 2015 के पहले दिन हुए नाटक अंधा युग के मंचन का। नाट्योत्सव का आयोजन मगध कलाकार और कला जागरण के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। धर्मवीर भारती के लिखे इस नाटक को बिहार आर्ट थियेटर की ओर से वरिष्ठ रंगकर्मी सुमन कुमार ने निर्देशित किया था। नाटक में महाभारत के अठारहवें दिन की शाम की कहानी से लेकर श्रीकृष्ण की मृत्यु तक को दिखाया गया।
नाटक यह संदेश देता है कि विवेकहीनता के कारण युद्ध होते हैं लेकिन इस युद्ध का कोई लाभ मिलता नहीं है। महाभारत काल में पांडव और कौरव दोनों ही पक्षों में विवेक की हार हुई थी। अंधाें से शोभित था उस युग का सिंहासन, यह अंधापन था भय का और ममता का, इसके परिणाम स्वरूप उनके बीच महाभारत का युद्ध हुआ और इसमें अगर सही मायने में किसी की जीत हुई तो वह थी इस अंधेपन की जीत। नाटक हर उस युग को अंधा युग कहता है जिसमें स्वार्थ जैसी अंधी प्रवृत्तियों के अधीन होकर मनुष्य मूल्य और मर्यादा की अवहेलना कर युद्ध को आमंत्रित करता है।
यहथी कहानी
नाटकमें दिखाया गया कि युद्ध के 18 वें दिन की शाम है, हर ओर उदासी छाई है, चारों ओर लाशों के ढेर लगे हैं, कौरवों के महलों के सूने गलियारों में दो बूढ़े प्रहरी घूम रहे हैं। धृतराष्ट्र जो पुत्र मोह में मर्यादा और नैतिकता की अनदेखी कर चुके हैं आज पुत्र शोक की अग्नि में जल रहे हैं। इस युद्ध में अपने पुत्रों की मौत से दुखी गांधारी इसका दोष कृष्ण को देती है। वह कृष्ण को शाप देती है कि तेरा और तेरे वंश को विनाश हो जाएगा। कुछ समय के बाद कृष्ण भी इस शाप के कारण मारे जाते हैं।
नाटक अंधा युग
नाटक नाटक अंधा युग कालिदास में अलोक धन्वा, राम कृपाल यादव, ऋषिकेश सुलभ, ध्रुव कुमार।
डॉ चतुर्भुज रंग पत्रकारिता सम्मान से किए गए सम्मानित
पटना। छठेअखिल भारतीय ऐतिहासिक नाट्योत्सव 2015 के पहले दिन इस वर्ष के डॉ चतुर्भुज रंग पत्रकारिता सम्मान से दैनिक भास्कर के पत्रकार साकिब इकबाल खां को वरिष्ठ साहित्यकार ऋषिकेश सुलभ के हाथों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव, बिहार राज्य संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष आलोक धन्वा, मगध कलाकार की अध्यक्ष डॉ मिथलेश कुमारी मिश्र, सचिव डॉ अशोक प्रियदर्शी, कला जागरण के अध्यक्ष गणेश सिन्हा, सचिव सुमन कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी अमीय नाथ चटर्जी, अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा समेत बड़ी संख्या में शहर के रंगकर्मी और बुद्धिजीवी मौजूद थे।
नाटक अंधा युग के मंचन से पहले हुई गणेश वंदना
प्रवीण सप्पू, सिद्धांत सिंह, रजनी शरण, प्रीति कुमारी, विभा सिन्हा, सुजीत कुमार उमा, पायल कुमारी, दीपक आनंद, विजय कुमार, विनोद यादव, उदय सागर, योगेश चंद्र श्रीवास्तव, निरंजन कुमार, विवेक कुमार, मोनू कुमार, राजकुमार ठाकुर, राकेश कुमार गांधी।
ये थे कलाकार
गांधी चौक का हुआ मंचन
रंगजमात के तहत प्रेमचंद रंगशाला में नुक्कड़ नाटक गांधी चौक का भी मंचन किया गया। नाट्य संस्था रंग रूप की प्रस्तुति और अंजारूल हक के निर्देशन में हुए इस नुक्कड़ नाटक के जरिये गांधी के विचारों को भूलते समाज को दिखाया गया। नाटक कहता है कि आज हमने गांधी जी मूर्ति तो हर चौक चौराहे पर लगा दी, उनके नाम पर चौक का नाम रख दिए पर उनके विचारों को नहीं अपनाया। आज अगर गांधी होते तो वह हिंसा, व्यभिचार को देख गांधी दुखी होते।
ये थे कलाकार
सुशांत आर्यन, ऋषिकेश कुमार, अभिषेक आनंद, पंकज राय, मो. आसिफ, राहुल कुमार, विष्णु कुमार, सूरज प्रकाश, अंजारूल हक।
drama
ये थे कलाकार
सुनीता भारती, उदित कुमार, चक्रपणि पाण्डेय, डॉ शंकर सुमन, मो. दानिश, सुजित कुमार शर्मा, नीरज कुमार, नीरज सिंह, वैभव विशाल, रंजन कुमार, प्रवीण कुमार।
निर्देशकसुमनकुमार
सहायकनिर्देशक सुनीताभारती
प्रस्तुतिप्रभारी प्रदीपगांगुली
प्रस्तुतिनियंत्रक कुमारअनुपम
प्रकाश-उपेंद्रकुमार, राजकुमार शर्मा