जलमीनार के लिए खोद डाले थे पार्क
बरसात में मिट्टी नीचे दब गई और गहरा गड्ढा बन गया। तब से लेकर अब तक पार्क में अक्सर पानी रहता है। गड्ढा होने की वजह से स्थानीय लोगों और बच्चों ने पार्क में जाना बंद कर दिया। अब पार्क के ज्यादातर हिस्से में कूड़े का ढेर रहता है।
डीबी स्टार ने राजधानी के पार्कों की पड़ताल शुरू की तो हर दिन नए-नए तथ्य सामने आए। आज जिन पार्कों की हालत दिखाई जा रही है, उनमें से दो को तो वाटर प्रोजेक्ट के लिए खोद डाला गया था। एक में पूरी खुदाई नहीं हो सकी, मगर उसे बर्बाद जरूर कर दिया गया। दूसरे में कोर्ट की रोक लगने से पहले ठीकठाक खुदाई हो चुकी थी। जैसे-तैसे भरा गया, लेकिन वह बेकार गया। लोग अब इसका रुख नहीं करते। देवेंद्र तिवारी की रिपोर्ट
एजी कॉलोनी पार्क
पार्कमें चारदीवारी बना पौधे लगाकर छोड़ दिया गया है। पार्क में लाइट आदि की व्यवस्था नहीं होने की वजह से रात के समय असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इसकी वजह से शाम के समय में स्थानीय लोग पार्क में नहीं जाते हैं। पार्क में लगे पौधे देखभाल के अभाव में खराब हो रहे हैं, मगर किसी का ध्यान नहीं।
राजवंशी नगर पार्क
पार्कका काम बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने कराया है। पार्क में जाने आने के लिए समय निर्धारित होने की वजह से मेंटेनेंस भी बेहतर है, हालांकि घास काफी बड़ी हो गई है। नए प्रावधान में इसका मेंटेनेंस बुडको को सौंपा गया है। टाइमिंग होने की वजह से दोपहर में इलाके के लोग पार्क का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।
शास्त्रीनगर, सीआईडी कॉलोनी पार्क
पार्कके निर्माण का कार्य बुडको ने करीब 78 लाख की लागत से कराया था। इसका काम जुलाई 2012 में शुरू हुआ था। हाल में पार्क का काम पूरा किया गया। बाहर से देखने में पार्क की हालत अन्य से काफी बेहतर है। वैसे, मेंटेनेंस की कमी साफ दिखाई देती है। नए आदेश के तहत इसका मेंटेनेंस बिहार राज्य आवास बोर्ड को सौंपा गया है। ठेकेदारों ने इस पार्क को दो गार्ड के हवाले कर रखा है। माली नहीं होने के कारण हाल में लगाई घास काफी बड़ी हो गई है। कई लाइटें भी खराब हैं।
पार्क रोड का पार्क, कदमकुआं
इलाकेके रोड को पार्क रोड नाम देने वाले इस पार्क में अब या तो मलबा मिलेगा या फिर तबेला। कभी इस इलाके की शान रहे इस पार्क को पहले वाटर प्रोजेक्ट के नाम पर खराब किया गया। बाद में स्थानीय लोगों के विरोध पर काम तो नहीं हुआ, ले