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- ...और, डीएसपी के एस्कॉर्ट में पहुंचा भीमाराव का काफिला
...और, डीएसपी के एस्कॉर्ट में पहुंचा भीमाराव का काफिला
मैसूर के आठ जिराफों में से एक भीमाराव का संजय गांधी जैविक उद्यान में कुछ इस तरह से प्रवेश हुआ। अब यह पटना जू का एकमात्र नर जिराफ है।
जू में दिखा गजब नज़ारा
जिराफ के उद्यान पहुंचने से पहले सचिवालय पुलिस भी पहुंच गई। जिराफ को कारगो पर जिस बॉक्स में रखा गया था, उसे क्रेन के जरिए उतारा गया। जैविक उद्यान के निदेशक एस. चंद्रशेखर ने बताया कि बंद-बंद में आठ दिनों की यात्रा कर आया जिराफ अचानक भीड़भाड़ देख बिदके नहीं, इसके लिए अलग व्यवस्था की गई। जिराफ के बॉक्स को स्लाइडिंग के जरिए गेट के अंदर अस्थाई ट्रैक से लाया गया और फिर उसे क्रेन के सहारे केज तक पहुंचाया गया। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद जिराफ को केज तक पहुंचाया जा सका। भीमाराव को छोड़ने आए मैसूर जू के सहायक निदेशक डाॅ. सुरेश कुमार और इसे लाने गए पटना जू के चिकित्सक डाॅ. समरेंद्र बहादुर सिंह, पशुपालक अशोक कुमार दीपेंद्र कुमार झा आिद ने सकुशल पहुंचने पर खुशी का इजहार किया। पटना जू के सहायक निदेशक एसके कर्ण ने बताया कि एक साल में भीमाराव प्रजनन योग्य हो जाएगा तो मादा जिराफों से नए मेहमान की आशा जागेगी।
डीबी स्टार > पटना 9334940256
कर्नाटकसेतेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के 2400 किलोमीटर के रास्ते को तय करते हुए भीमाराव का काफिला आखिरकार आठ दिनों में मैसूर से पटना पहुंच गया। बख्तियारपुर-पटना फोर लेन से भीमाराव का काफिला जब दीदारगंज पहुंचा तो डीएसपी (ट्रैफिक) विजय कुमार ने एस्कॉर्ट कर इसे संजय गांधी जैविक उद्यान तक पहुंचाया। यहां भी खूब आवभगत हुई। भीमाराव को पिंजरा से बाहर नहीं निकाला गया, पांव जमीन पर नहीं पड़े। एक ट्रैक बिछाकर पूरी सुरक्षा में अंदर ले जाया गया। जैविक उद्यान की मादा जिराफों सृष्टि और शांति के लिए आए नर साथी भीमाराव की जैसी आवभगत मंगलवार शाम पटना में हुई, वैसी शायद ही मैसूर में कभी हुई होगी।
पहलेसे थी पूरी तैयारी
संजयगांधी जैविक उद्यान से एक जोड़ा गैंडा के बदले पहले ही 12 पशु-पक्षी मैसूर चिड़ियाघर से चुके हैं। आम दर्शकों के लिए उन 12 का लोकार्पण नहीं हुआ है, भीमाराव के आने के बाद अब एक साथ सारे दर्शकों के सामने आएंगे। इस कारण नर जिराफ भीमाराव का बेसब्री से इंतजार हो रहा था। डीबी स्टार ने आठ सितंबर को मैसूर से जिराफ की रवानगी और 16 सितंबर को पटना पहुंचने की