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भोजपुरी फिल्मों के सारे सिनेमाघर मैनुअल टिकट पर, टिकटों में हो रही हेराफेरी
यह तस्वीर किसी सिनेमा हॉल विशेष को दर्शाने के लिए नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा प्रदर्शित करने वाले सिनेमाघरों के बारे में है। वैसे, टिकट लिए बगैर यहीं पर प्रवेश कराया एक कर्मी ने।
हिंदी
भोजपुरी
5%
75%
नोटः रितेश ठाकुर से छोड़कर बाकी सभी प्रोड्यूसर की खुद की फिल्म वितरण कंपनी
} डॉ सुनील कुमार } अभय सिन्हा } आलोक कुमार } रितेश ठाकुर } सुनील बुबना } प्रवेश लाल यादव
01
10-15
100
1.5
लाख भोजपुरी
करोड़ की भोजपुरी फिल्म
करोड़ की िहंदी फिल्म
करोड़ िहंदी
4.5 करोड़
एक करोड़
बॉक्स आफिस कलेक्शन
}न्यूनतम बिजनेस
}किक
}निरहुआ हिंदुस्तानी
साल की सबसे हिट फिल्म
संभावना सेठ 1 लाख
राखी सावंत 1.5 लाख
सीमा सिंह 50000
निरहुआ 30-50
खेसारीलाल 30-50
पवन सिंह 30-50
राकेश मिश्रा 5-15
अरविंद अकेला 5-15
रानी चटर्जी 3-10
अंजना सिंह 3-10
काजल राघबानी 3-10
प्रियंका पंडित 3-10
अक्षरा सिंह 3-8
मोनालिसा 3-8
पाखी हेगड़े 3-8
टैक्स भी है एक वजह
सरकार हर थियेटर से टैक्स के रूप में एक निश्चित राशि (कंपाउंड टैक्स) वसूलती है। फिल्म चले या नहीं चले, थियेटर मालिकों को कंपाउंड टैक्स देना ही पड़ता है। जो फिल्में नहीं चलती हैं, उस फिल्म की वसूली थियेटर मालिक पॉपुलर फिल्मों से करते हैं। भोजपुरी फिल्मों के एक डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया कि पॉपुलर फिल्मों में जमकर टिकटों की कालाबाजारी होती है। ये कालाबाजारी थियेटर मालिक खुद करवाते हैं। वह पॉपुलर फिल्मों की टिकट बिक्री की सही जानकारी निर्माताओं को नहीं देते हैं ताकि प्रॉफिट शेयरिंग से बचा जा सके।
प्रॉफिट बांटने का फॉर्मूला
फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर फिल्म रिलीज पर पहले सप्ताह लगभग 11 हजार रुपए प्रति थियेटर खर्च करता है। एक फिल्म में जितनी टिकट बिक्री होती है, उसका 30 प्रतिशत थियेटर मालिक रखते हैं। 70 प्रतिशत डिस्ट्रीब्यूटर को दिया जाता है। इसमें अपने पहले सप्ताह का खर्च काटने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर बाकी की राशि का 20 प्रतिशत खुद रखते हैं और 80 प्रतिशत राशि निर्माता को देते हैं।
^ ऐसी आशंका कभी-कभी बनती है, हालांकि प्रबंधन अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करता है कि टिकटों की कालाबाजारी नहीं हो। अगर कोई बिना टिकट हॉल में प्रवेश करा रहा है तो उसपर सख्त कार्रवाई करेंगे। ऐसी समस्याओं से हमारी छवि