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दवा घोटाले में सरकार ने नीतीश को दी क्लीनचिट
राज्यसरकार ने दवा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री नीतीश कुमार को क्लीन चिट दे दी है। उनके द्वारा उठाए गए प्रश्नों का जवाब तैयार कर लिया गया है। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह के 27 सितम्बर को लंदन से वापस लौटने के बाद नीतीश को जवाब भेजा जाएगा। भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार पर दवा घोटाले के संबंध में आरोप लगाए हैं।
सरकार के अनुसार दवा एवं उपकरण खरीद में बीएमएसआईसीएल ने संचिका में कभी भी स्वास्थ्य मंत्री के नाते नीतीश कुमार से आदेश नहीं लिया है। क्रय समिति और तकनीकी समिति के कार्यों एवं निर्णयों में भी नीतीश की कोई भूमिका नहीं थी। सरकार ने दवा खरीद के लिए उत्तरदायी स्वास्थ्य विभाग के दोनों उपक्रमों बीएमएसआईसीएल और राज्य स्वास्थ्य समिति (एसएचएस) से संबंधित अलग-अलग जवाब तैयार किए हैं। भाजपा के आरोपों के बाद नीतीश ने 11 सितम्बर को अपनी चुप्पी तोड़ी थी। उन्होंने मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह को पत्र लिख कर स्वास्थ्य विभाग में दवा घोटाले से जुड़ी तमाम जानकारियां सार्वजनिक करने का अनुरोध किया था और पारदर्शिता के तहत पत्र फेसबुक पर भी जारी किए थे।
प्रश्न 1 : टेंडर में कब-कब मंत्री का आदेश लिया गया?
बीएमएसआईसीएल-कभीनहीं लिया।
एसएचएस-अनुमोदनप्राप्त करने का आदेश नहीं था, इसलिए अनुमोदन प्राप्त नहीं किया।
प्रश्न2 : टेंडर किस स्तर से निकाला?
बीएमएसआईसीएल-एमडीस्तर से। जनवरी 2012 में पहला टेंडर हुआ पर रद्द हो गया। फिर फरवरी 2013 में टेंडर हुआ। उपकरण के लिए मई 2012 से आवश्यकता अनुसार टेंडर हुआ।
एसएचएस-ईडीस्तर से टेंडर निकाला। दवा के लिए राउंड-8 का टेंडर दिसम्बर 2010, राउंड- 9 का टेंडर सितम्बर 2011 और राउंड- 10 का टेंडर अप्रैल 2013 में हुआ।
प्रश्न3 : क्रय समिति और तकनीकी समिति का गठन किसके आदेश से हुआ? क्या इनके निर्णयों में मंत्री की कोई भूमिका थी?
बीएमएसआईसीएल-दोनोंसमितियों का गठन 11 मार्च 2013 को एमडी बीएमएसआईसीएल सह सचिव स्वास्थ्य विभाग के अनुमोदन से हुआ। स्वास्थ्य मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी।
एसएचएस-तकनीकीकोर कमेटी का गठन अंतिम बार 7 जुलाई 2010 में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के अनुमोदन से हुआ। न्यूनतम दर तय करने वाली परियोजना आकलन समिति का गठन अंतिम बार 11 अक्टूबर 2008 को राज्य के विकास आयुक्त की अ