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मंजूरी के छह माह बाद भी नहीं मिले छह करोड़
अनुपम कुमार > पटना 9334940256
बिहारनेशनलकॉलेज राजधानी के सबसे बड़े पुराने कॉलेजों में एक है। 1889 में इसकी स्थापना हुई। पटना विवि की स्थापना के समय से ही यह उसका अंग है। इसके बावजूद इनदिनों उसकी स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 20 वर्षों में यहां छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ है, जबकि शिक्षकों की संख्या घटी है। इस दौरान यहां संरचनात्मक विकास भी नहीं हुआ है। जरूरत अनुसार नए भवन का निर्माण नहीं होने के कारण जगह की कमी पड़ गई है। राशि की कमी के कारण पुराने भवन की मरम्मत भी रुकी पड़ी है। छह महीने पहले इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए राज्य सरकार ने कॉलेज को छह करोड़ रुपए स्वीकृत किए, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने अबतक तो कॉलेज को राशि जारी की और ही अपनी किसी एजेंसी से काम करवाया।
वर्षोंसे नहीं बढ़ी छात्रावास में सुविधाएं
बीएनकॉलेज का मुख्य छात्रावास पटना का सबसे बड़ा छात्रावास है, जिसमें 302 कमरे हैं। कई वर्षों से इसमें तो छात्रों के लिए किसी नई सुविधा का विकास किया गया है और ही इसका ठीक से रखरखाव किया गया है। इसके कारण इन दिनों छात्रावास की स्थिति बुरी हो गई है। जनवरी 2014 में इस छात्रावास को अपडेट करने के लिए शिक्षा विभाग के द्वारा दो करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक कॉलेज को राशि नहीं मिली है। कॉलेज के अधिकारियों ने इस संबंध में विभाग मुख्यमंत्री दोनों को पत्र लिखा लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
बीएन कॉलेज के कैंपस इंचार्ज डॉ. डी एन सिन्हा से सीधी बात
राशिकी कमी से रखरखाव मुश्किल
इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कितने समय से राशि नहीं मिली है?
लगभग20 वर्षों से कॉलेज को इस मद में कोई बड़ी राशि नहीं मिली है। पिछले वर्ष एक छोटी राशि मिली थी, जो कॉलेज भवन के एक हिस्से की पुताई में ही खर्च हो गया।
राशिनहीं मिलने से क्या समस्या रही है?
इससेकॉलेज भवन का रखरखाव मुश्किल हो गया है। प्रिंसिपल की कोठी ढह गई, वार्डन की ढह रही है और हॉस्टल सुपरिनटेंडेंट की ढहने वाली है।
शिक्षकोंकी कमी से क्या समस्या रही है?
कक्षाओंका संचालन मुश्किल हो गया है। एक ही विषय में पीजी की पढ़ाई बची है। वह भी बंद होने के कगार पर है। स्थिति तो प्रतिकूल है ही, लेकिन किसी तरह काम चलाने का प्रयास हो रहा।
गैर शैक्षणिक कर्मियों की भी यहां कमी
कॉलेज में गैर शैक्षणिक कर्मियों की भी भारी कमी है। उनके 200 सृजित पद हैं, जबकि 85 कर्मी ही कार्यरत हैं। इससे फाइल वर्क में समस्या रही है।
शिक्षकों की कमी से बंद हुए कई विभाग
बीएनकॉलेज में 3000 छात्र पढ़ते हैं। इसमें लगभग 40 प्रतिशत छात्राएं हैं। कॉलेज में शिक्षकों की भारी कमी है। यहां शिक्षकों के 150 पद सृजित हैं, जबकि केवल 53 शिक्षक ही कार्यरत हैं। शिक्षक छात्र अनुपात यूजीसी के मानक 1:25 से बढ़ कर 1:56 हो गया है। कॉलेज में बीए और बीएससी ऑनर्स के साथ 14 विषयों में पीजी की पढ़ाई भी होती थी। इनमें रसायन विज्ञान, पदार्थ विज्ञान,जन्तु विज्ञान,भू विज्ञान, भूगोल, इतिहास, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, दर्शन शास्त्र, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, बंगला मैथली शामिल थे। शिक्षक की कमी से इनमें से 13 विषयों में पीजी की पढ़ाई बंद हो गई है। अब यहां केवल अंग्रेजी में पीजी की पढ़ाई होती है।
20 वर्षों से नहीं हुआ बीएन कॉलेज में संरचनात्मक विकास का काम
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