पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • गंडक में छोड़ा, सोन तक पहुंच गया घड़ियाल

गंडक में छोड़ा, सोन तक पहुंच गया घड़ियाल

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पिछलेवर्ष17 अप्रैल को जिन छह घड़ियालों को गंडक नदी में छोड़ा गया था, उनमें से एक 400 किमी की दूरी तय कर ली है। यह घड़ियाल धारा के बहाव के साथ गंगा नदी और वहां से बहाव के विपरीत तैरते हुए 15-20 किमी दूर सोन पहुंचा। आखिरी सूचना तक यह घड़ियाल सोन में 30-40 किमी भीतर अरवल के पास पहुंच चुका था। अन्य 5 घड़ियाल भी गंडक में स्वाभाविक बहाव के साथ पटना की ओर सौ किमी तक चुके हैं। घड़ियाल के गले में बंधे सेटेलाइट ट्रांसमीटर के सिग्नल से यह जानकारी मिली।

12घड़ियाल बुधवार को छोड़े गए

बुधवारको 12 घड़ियालों के एक और दल को वाल्मीकिनगर अभयारण्य में छोड़ा गया। इसमें 11 मादा और एक नर है। इनमें से दो के शरीर पर रेडियो ट्रांसमीटर लगा हुआ है। इनकी गतिविधियों की मॉनीटरिंग के लिए उस क्षेत्र में कई फील्ड बायोलॉजिस्ट घूम रहे हैं। उनके पास एक एंटीना लगा रिसीवर होता है, जो रेडियो ट्रांसमीटर के सिग्नल को कैच करता है।

वाल्मीकिनगर अभयारण्य परिक्षेत्र स्थित गंडक नदी के तट पर छोड़े जा रहे घड़ियालों की तस्वीर। साथ ही, पिछली बार भेजे गए घड़ियालों की हो रही मॉनीटरिंग।

उन्मुक्त जीवन खूब भा रहा पटना जू के घड़ियालों को

दो तीन किमी में है जमावड़ा

इससे पहले 19 जनवरी को 12 घड़ियालों का एक दल वाल्मीकिनगर में छोड़ा गया था। उनमें से दो के शरीर में रेडियो ट्रांसमीटर लगे हुए थे। उनकी मॉनीटरिंग से मालूम हुआ है कि वे वाल्मीकिनगर अभयारण्य के भीतर दो-तीन किमी के रेंज में ही पिछले एक महीने से जमे हुए हैं। संभवत: प्राकृतिक जीवन के थोड़ा अभ्यस्त हो जाने के बाद ये घड़ियाल भी पहले दल की तरह लंबी यात्रा करें।

^यह बिहार स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की एक महत्वाकांक्षी योजना है। बिहार में यह पहला अवसर है जब जू से जानवर को उसके प्राकृतिक अधिवास में वापस लाया गया है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा तो इससे घड़ियालों को विलुप्त होने से बचाने में मदद मिलेगी।

डॉ.समीर कुमार सिन्हा

प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर, घड़ियाल रीइंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट