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साल में 15 दिन ही गुलजार रहता है एक रेलवे स्टेशन

7 वर्ष पहले
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गया-मुगलसरायरेलखंड का अनुग्रह नारायण रोड घाट स्टेशन पूरे साल में मात्र पंद्रह दिनों तक ही अाबाद रहता है। यह मौका तब आता है, जब दुनिया भर के लोग अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए पुनपुन नदी में पहला पिंडदान करने यहां आते हैं। अन्य दिनों में यहां ट्रेनों का ठहराव दिया जाता है, और यहां से यात्री आते-जाते हैं। इस स्टेशन पर टिकट काउंटर, यात्री शेड जैसी तमाम संरचनाएं हैं, पर ‘पितृपक्ष स्पेशल’ इस स्टेशन पर किसी रेलकर्मी की स्थायी तैनाती तक नहीं है। पंद्रह दिनों के लिए पितृपक्ष के दौरान यहां पैसेंजर ट्रेनें रुकती हैं। इस दौरान चार-पांच कर्मियों की अस्थाई तैनाती होती है।

वर्षों पहले यहां कुछ ट्रेनों को छोड़ सारी ट्रेनों का ठहराव पितृपक्ष के दौरान होता था। अब उपेक्षा की हालत यह है, कि पिंडदानियों के लिए एक-दो पैसेंजर ट्रेनों के अलावा कोई ट्रेन नहीं रूकती, जबकि इस रूट से पितृपक्ष के दौरान गया-जबलपुर, गया-हबीबगंज जैसे स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।

अगस्त्य पद पर श्राद्ध से पितरों को होती है ब्रह्मलोक की प्राप्ति

श्रद्धालु का आज के क्रम में सोलह वेदी में जो श्री विष्णुपद के आग्नेय कोण पर स्तम्भ के रूप में अवस्थित है वहां पर आज मतंग पद, क्रांच पद, इन्द्रपद, अगस्त्य पद, कश्यप पद पर श्राद्ध करें। इससे पितरों को विशेष लोक प्राप्त होता है। अगस्त्य पद, क्रांच पद, मतंगपद, पर श्राद्ध करने से पितरों को ब्रह्म लोक प्राप्त होता है। इन्द्रपद पर श्राद्ध करने से पितरों को इन्द्र लोक (स्वर्ग) की प्राप्ति होती है। सोलह वेदी से उत्तर पितरों के स्वर्ग की कामना से गजकर्णिका के पास दूध से तर्पण करें। तर्पण के समय ताम्बे का अर्घा प्रयोग होता है। ताम्बे और दूध का सम्पर्क नहीं हो, अतः यहां अरघे का प्रयोग नहीं होगा। दूध के अभाव में गंगाजल या शुद्ध जल का प्रयोग किया जा सकता है। ताम्बे के सम्पर्क में साधारण जल भी गंगाजल के समान होता है।

पुनपुन तट पर विधान परिषद सदस्य ने किया पिंडदान

पुनपुन (पटना)| पुनपुननदी के तट पर पितृपक्ष मेला मे सोमवार को बिहार विधान परिषद सदस्य प्रो रणवीर नंदन पिंडदान करने पहुंचे। पार्षद अपनी प|ी नर्मदा के साथ आए थे। उनका कहना था, कि आध्यात्मिक मान्यता के कारण ही मैं यहां चला आया। ऐसी जगहों पर पर्यटन विभाग की खास नजर है और विभाग इस