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मानदेय को मिली राशि ले बैठी एजेंसी

7 वर्ष पहले
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20 21 जून के अंक में प्रकाशित खबर।

बेल्ट्रान ने झाड़ा पल्ला

ऑपरेटर सोमवार को मानदेय के लिए आईटी विभाग पहुंचे तो उन्हें बेल्ट्रान भेज दिया गया। बेल्ट्रान में ऑपरेटरों ने बकाए मानदेय को लेकर बात की तो उसने साफ मना कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेटरों को निजी एजेंसी एकेएस ने रखा था। ऐसे में उनकी कोई देनदारी नहीं बनती है।

प्राइवेट कंसल्टेंसी की तरफ से रखा गया था

प्रोजेक्ट के बेहतर संचालन के लिए पटना की एकेएस कंसल्टेंसी के तहत चार जिलों में सौ से अधिक ऑपरेटरों काे रखा गया था। इन्हें हर माह मानदेय के रूप में केवल तीन हजार रुपए का भुगतान किया जाता था। करीब डेढ़ साल से अधिक समय से इनका मानदेय देना बंद कर दिया गया। ऑपरेटरों ने जब एजेंसी से अपने भुगतान की बात की तो उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट का काम देख रही वैमटेक ने उनका भुगतान नहीं किया है। इसकी वजह से वह ऑपरेटरों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। बाद में एजेंसी ने उलटफेर कर दिया।

डीबी स्टार > पटना

ई-डिस्ट्रिक्टपायलटप्रोजेक्ट के तहत काम करने वाले ऑपरेटरों के मानदेय के लिए पैसा जारी होने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। ऑपरेटरों ने 15 माह से मानदेय नहीं मिलने के बाद मुख्यमंत्री के जनता दरबार से शिकायत की थी। इसके बाद हुई कार्रवाई में प्रोजेक्ट का काम देख रही एजेंसी को 28 लाख रुपए जारी किए गए थे। एजेंसियों ने केवल तीन माह का मानदेय दे खानापूर्ति कर दी। इसके बाद से सभी ऑपरेटर अपने मानदेय के लिए आईटी डिपार्टमेंट से बेल्ट्रान और प्रोजेक्ट का काम देख रही कंपनी के चक्कर लगा रहे हैं।

केन्द्र सरकार की योजना ई-डिस्ट्रिक्ट के लिए प्रदेश के चार जिलों गया, मधुबनी, औरंगाबाद और नालंदा काे शामिल किया गया था। प्रोजेक्ट के तहत लोगों को ब्लाॅक से मिलने वाली सभी सुविधाएं गांव में ही मिल रही थीं। इससे लोगों काे कम खर्च में सरकारी सुविधाएं मिल रही थी। बीते 17 जून को बिहार सरकार ने चारों जिलों में ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट को बंद कर दिया था। मामले का खुलासा डीबी स्टार ने 20 जून के अंक में किया था। प्रोजेक्ट बंद होने के बाद साल भर से अधिक के बकाए के लिए ऑपरेटर विभागों का चक्कर लगा रहे हैं। हर स्तर पर फरियाद के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।

^वैमटेकको बेल्ट्रान ने पैसा नहीं दिया है। थोड़ा-बहुत जो भी राश मिली थी, उसमें से कई अन्य ख