जातिवाद कर रहा है समाज को खोखला
नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन
देशमें 21 वीं सदी में भी जातिवाद की समस्या खत्म नहीं हुई। जातिवाद समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। एक ओर इंटरनेट क्रांति के दौर में हम जी रहे हैं,वहीं दूसरी ओर जातिवाद से ऊपर उठ नहीं पाए हैं। यह बातें कही गईं गुरुवार को प्रेमचंद रंगशाला में मंचित नाटक कोर्ट मार्शल में। यहां चल रहे रंग-ए-जमात नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन मास्क, पटना और सेंट्रल रिसोर्ट फॉर ह्यूमन आर्गेनाइजेशन, रांची के बैनर तले मृत्युंजय प्रसाद निर्देशित और स्वदेश प्रसाद लिखित इस नाटक का मंचन किया गया।इसमें समाज में फैले जातिवाद के दंश को दिखाया गया। नाटक कहता है कि गांवों में जाति के नाम पर कमजोर तबके के लोगों का उत्पीड़न जारी है। यह बुराई गांवों से लेकर शहरों तक फैली हुई है। इतना ही नहीं देश की सेवा के नाम पर सेना में जाने वाले लोग भी जातिवाद से ऊपर नहीं उठ पाते।
प्रेमचंद रंगशाला के प्रेक्षागृह में नाटक कोट मार्शल की प्रस्तुत देते कलाकार।
मनोज मानव, अविनाश, विशेष अखौरी, हरिशंकर रवि, विशाल तिवारी, महेंद्र बहादुर, आदर्श रंजन, दीपांकर आदि।
रंग-ए-जमात में गुरुवार को तीन नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति हुई। पहला नुक्कड़ नाटक था करप्शन इन एजुकेशन, स्ट्रगलर्स की प्रस्तुति इस नाटक के निर्देशक थे उत्तम कुमार। दूसरा नाटक था रंग समूह की प्रस्तुति सिक्यूरिटी गार्ड की बहाली, इसके निर्देशक थे कुमार उदय सिंह, वहीं तीसरा नाटक आशा, छपरा की ओर से प्रस्तुत किया गया। इसके प्रस्तुति नियंत्रक थे राजेश राजा।