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डाउनलोड करेंपटना. अगले साल तक राजधानी में 97 जगहों पर एडेप्टिव ट्रैफिक लाइट लग जाएंगी। ये लाइट इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत काम करती हैं। इस सिस्टम से यह पता चलता है कि सड़क पर वाहनों की कतार कितनी लंबी है। यानी ट्रैफिक सिस्टम में लगी लाल, हरी व पीली बत्ती के जलने व बुझने का समय फिक्स्ड न हो कर, इस पर निर्भर करता है कि किस सड़क पर वाहनों का दबाव कितना है।
इस सिस्टम से यह भी पता चलता है कि आगे जाम है, इसलिए हमें किस ओर जाना है, सिग्रल खुद ही ट्रैफिक को डायवर्ट कर देगा। इसके लगने के बाद लोग जाम में फंसने से बच सकेंगे और वैकल्पिक रास्ते से जा सकेंगे।इस सिस्टम के तहत चौराहों पर सेंसर युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनकी कंट्रोलिंग के लिए सेंट्रलाइज कंट्रोल रूम बनेगा।परेशन की जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की होगी। बिजली भुगतान, मरम्मत व डैमेज कंट्रोल नगर निगम को करना होगा।
26.71 करोड़ खर्च होंगे
इस सिस्टम पर 26.71 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। उसने डीपीआर तैयार कर ली है। ये लाइट सगुना मोड़ से पटना सिटी व पटना-फुलवारीशरीफ रोड, गांधी मैदान के आसपास लगाई जाएंगी। फायदा ईंधन व समय की बचत। जाम से छुटकारा। हादसों में कमी। सड़क पर हादसा होने या जाम के दौरान ट्रैफिक को डायवर्ट करेगा। सिग्नल बताएगा कि किस तरफ रास्ता खाली है।
पहले यहां थी लाइट
डुमरा मोड़, ललित भवन, आईपीएस मेस, हड़ताली मोड़, बेली रोड क्रॉसिंग, बोरिंग रोड, शिवपुरी मोड़, आयकर चौराहा, वोल्टास मोड़, कोतवाली टी, डाकबंगला चौराहा, भट्टाचार्य मोड़, चिरैयाटांड़ पुल उत्तरी व दक्षिणी छोर, एग्जीबिशन रोड, बाकरगंज, नाला रोड व अनीसाबाद।
क्या है एडेप्टिव ट्रैफिक लाइट
एडेप्टिव सिग्नल कंट्रोल टेक्नोलॉजी सेंसर पर आधारित होता है।
इस सिस्टम में लगे सेंसर गाडिय़ों की संख्या और दिशा के आधार पर रुकने-चलने का सिग्नल संदेश देते हैं।
सेंसर की मदद से सिग्नल सिस्टम लाइट के समय का निर्धारण करता है।
इसके लिए सेंट्रलाइज कंट्रोल रूम होता है। उसमें एक सॉफ्टवेयर होता है, जो सेंसर से प्राप्त संदेशों के आधार पर सिग्नल को कमांड देता है।
ऐसे करेगा काम : फर्ज कीजिए, एक सड़क पर पांच गाडिय़ा हैं और दूसरी ओर 20 गाडिय़ां। अभी सिग्नल में समय फिक्स्ड रहता है। जिधर पांच गाडिय़ा हैं, उस साइड के लिए जितना समय मिलता है, उतना ही जिधर 20 गाडिय़ा हैं, उस साइड के लिए भी। एडेप्टिव सिस्टम में पांच गाडिय़ां निकल जाएंगी तो उधर तुरंत लाल बत्ती जल जाएगी। वैकल्पिक रूट का चलेगा पता लोगों को जाम के दौरान वैकल्पिक रास्ता बताया जाएगा। धरना-प्रदर्शन के दौरान जब चारों ओर जाम लग जाएगा, तो यह सिस्टम कैसे काम करेगा, इस पर मंथन चल रहा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
संजीव सिन्हा, ट्रैफिक एक्सपर्ट, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग, एनआइटी
वर्तमान में सड़कों पर 30 फीसदी अतिक्रमण है। इस वजह से औसत चौड़ाई दो मीटर घट गई है। इसलिए अतिक्रमण हटाना होगा। जहां सड़कें कर्व होती हैं, वहां यह सिस्टम कैसे काम करेगा, यह सोचना होगाप्रदर्शन के दौरान जाम के कारण सिस्टम कैसे काम करेगा, इस पर मंथन करना होगा।
दो साल में ही खराब हो गई लाइट
वर्ष 2005 में 17 स्थानों पर ट्रैफिक लाइट लगी थी। इस पर एक करोड़ 19 लाख, 63 हजार 605 रुपए खर्च हो गए। ये लाइट डेढ़-दो साल में ही खराब हो गईं। कोलकाता की कंपनी को मेंटनेंस करना था। वह फरार हो गई। 2011 में कोतवाली थाने में उस पर केस हुआ था। कंपनी ने पुरानी पद्धति से लाइट लगाई थी। इसमें सिग्नल के समय फिक्स्ड थे।
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