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पितृपक्ष मेला के लिए पुनपुन में सफाई को ले मुस्तैद हुआ प्रशासन

7 वर्ष पहले
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(12 सितंबर से पहले पुनपुन नदी के घाट पर गंदगी और सूअर के बीच पिंडदान व कर्मकांड करते श्रद्धालु।)
पुनपुन. पुनपुन नदी के तट पर लगे पितृपक्ष मेले में सफाई का खास ख्याल रखा जा रहा है और इसके लिए 12 घंटे 5 सफाई कर्मी लगातार पिंडदान स्थल की सफाई करने में जुटे हैं, लेकिन 2 दिन पहले स्थिति विपरीत थी। शुभारंभ के 4 दिन बाद ही नदी के तट पर गंदगी दिखने लगी थी। इस कारण पिंडदान करने आए लोग खासे परेशान थे। पुनपुन नदी के तट पर पिंडदान करने पहुंचे जहानाबाद के विजय कुमार सिन्हा और किरण सिन्हा ने प्रशासन से इसकी शिकायत भी की थी।
पितृपक्ष मेला में फैली गंदगी के बारे में दैनिक भास्कर ने 12 सितंबर को खबर प्रकाशित करते हुए मेला प्रशासन के पदाधिकारी सह पुनपुन अंचलाधिकारी अशोक कुमार गुप्त को इस बात की जानकारी दी थी। उसके बाद पदाधिकारी ने सफाई पर सफाई कर्मियों को विशेष ध्यान देने का निर्देश जारी किया।
दक्षिणाग्नि पद श्राद्ध से वाजपेय यज्ञ के समान मिलता है फल
श्रद्धालु सातवें दिन अर्थात षष्ठी तिथि को फल्गु गंगा में स्नान-तर्पण श्री विष्णु चरण के दर्शन-पूजन करने के बाद कार्तिक पद पर पार्वण श्राद्ध सम्पन्न करें। ‘कार्तिकेय पदे श्राद्धी शिवलोके नेयोत्चित्वन।’ अर्थात कार्तिकेय पद पर श्राद्ध करने से शिवलोक प्राप्त होता है। कार्तिकेय पद श्राद्ध सम्पन्न करके दक्षिणाग्नि पद पर श्राद्ध करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है फिर गार्हपत्य पद पर श्राद्ध करें।
गार्हपत्य वेदी पर जो श्राद्ध करता है उसे राजसूय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। सूर्य पद पर श्राद्ध सम्पन्न करने से पितरों को सूर्यपद प्राप्त होता है। यह सभी वेदियां विष्णु पद प्रांगण में ही विष्णुपद से अग्निकोण एवं पितृच्छाया महादेव से पश्चिम दिशा में हैं। यहां का जमीन उबड़-खाबड़ शिला होने के कारण आसपास समतल स्थान पर श्राद्ध करके वेदियों के स्तम्भ में पिण्ड को स्पर्श कराते हुए विष्णुपद पर चढ़ा दिया जाता है। सोलह वेदी में पांच वेदियों का श्राद्ध षष्ठी तिथि को होता है।
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