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समाचार विश्लेषण : जनता परिवार का महामोर्चा समय की जरूरत

7 वर्ष पहले
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पटना. एक तरफ कांग्रेस मुरझा रही है तो दूसरी ओर भाजपा का हौसला सातवें आसमान पर है। ऐसे में जनता परिवार का महामोर्चा आज के समय की जरूरत थी। वह पूरी हुई। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए भी यह जरूरी है कि विपक्ष भी मजबूत हो।
मुलायम सिंह यादव के यहां जुटे नेताओं का मंसूबा तो विभिन्न दलों में बिखरे पूरे जनता परिवार को एक बार फिर एक दल में शामिल कर देने का है। साथ ही, वे यह भी चाहते हैं कि सभी गैर भाजपा - गैर कांग्रेसी दल मिलकर काम करें। यह ऊंचा लक्ष्य है। पर, फिलहाल जो कुछ भी वे कर पाए हैं, उसे भी सही दिशा में सही कदम ही माना जाएगा।
एक और अच्छी बात यह हुई है कि जनता परिवार के नेताओं ने नीतीश कुमार को अपना प्रवक्ता बना कर मीडिया के सामने पेश किया है। संतुलित और सुलझे हुए नेता की जनता परिवार में कमी रही है। ऐसे में नीतीश कुमार उनके काम आएंगे।
घनघोर जातिवाद, धर्मनिरपेक्षता का ओवरडोज, परिवारवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण जनता परिवार के अनेक नेताओं का इकबाल हाल के वर्षों में काफी घटा है। इन बुराइयों को निरुत्साहित करके ही जनता परिवार के समझदार नेता भाजपा व खास तौर पर नरेंद्र मोदी का कारगर मुकाबला कर पाएंगे।
क्या ऐसा वे कर पाएंगे ?
सपा, राजद, इनेलोद, जदयू और जद(एस) के नेताओं की बैठक के बाद नीतीश कुमार ने मीडिया से जो कुछ कहा, उससे तो यह साफ लगा कि वे विवादास्पद मुद्दों को किनारे ही करना चाहते हैं। यह शुभ संकेत है।उपर्युक्त दलों के अधिकतर नेता कभी समाजवादी नामधारी पार्टी में रहे हैं। उनके आदर्श पुरुष गांधी, लोहिया और जय प्रकाश रहे हैं।
उम्मीद है कि महामोर्चा के लिए काम करते हुए नीतीश कुमार तथा अन्य नेतागण इस बात को याद रखेंगे।राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार महामोर्चा को यह बात अच्छी तरह समझ लेनी होगी कि कांग्रेस की किन कमजोरियों का लाभ उठा कर भाजपा या फिर कहिए नरेंद्र मोदी ने चुनावी सफलता पाई।
कांग्रेस की मुख्य कमजोरी यह रही कि उसके प्रथम परिवार में कोई भी कमी देखने की किसी स्तर के कांग्रेस कर्मियों को कोई इजाजत ही नहीं है। दूसरी कमी यह रही कि कांग्रेस की सरकारें आम तौर पर अन्य सरकारों से अधिक भ्रष्ट व अहंकारी रही। अधिकतर मतदाताओं के अनुसार गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की तीसरी और सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने एकतरफा व ढोंगी धर्मनिरपेक्षता को मुख्य चुनावी मुद्दा बना दिया था।
इन मुद्दों पर गांधी, लोहिया और जय प्रकाश नारायण के विचारों, कर्मों और जीवन शैली को महामोर्चा अपना सचमुच आदर्श माने तो उसे भाजपा सरकार का मुकाबला करने में सुविधा होगी। इस मामले में भारत का संविधान भी महामोर्चा के नेताओं के लिए बढ़िया दिशा निर्देशक का काम कर सकता है।