पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री
सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी देखते ही रह गए और जदयू के बाहुबली विधायक तथा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दाहिना हाथ माने जाने वाले तथा उनकी रैलियों में भीड़ जुटाने वाले अनन्त सिंह ने कानून और कोर्ट के आदेश को धत्ता बताते हुए अवैध रूप से बने पटना सेन्ट्रल मॉलज् का उद्घाटन कर लिया।
इससे साफ होता है कि बिहार में आतंक और जंगल राज कायम हो गया है। इसी का नतीजा है कि चार दिन पहले रंगदारों से परेशान होकर फ्रांस की मल्टीनेशनल शक्यूतज् की सहयोगी कम्पनी च्रिद्धि-सिद्धिज् को हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी है।
सत्ताधारी दल के विधायक अनन्त सिंह का यह दुःसाहस ही है कि नगर आयुक्त कोर्ट और ट्रिब्यूनल के फैसले तथा पटना हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर अवैध तौर से निर्मित शॉपिंग मॉल का सार्वजनिक उद्धाटन कर लिया। नगर निगम को इस मॉल की छठी व सातवीं मंजिल पर आपत्ति थी और उसे तोड़ने के साथ ही मॉल के बगल के विवादास्द कम्पलेक्स की तीनों मंजिलों को तोड़ने का आदेश दिया था।
पुलिस और प्रशासन का कोई भी अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सत्ता के संरक्षण की वजह से निगमायुक्त के पत्र लिखने के बावजूद अनन्त सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। पटना नगर निगम के आयुक्त का मानना है कि पुलिस कानून का राज स्थापित करने में विफल रही।
वहीं, निगम प्रशासन ने पिछले एक साल में बील्डिंग बायलॉज के उल्लंघन के आरोप में निर्माणाधीन करीब 1200 अपार्टमेंट और भवनों के निर्माण पर रोक लगा रखा है। ऐसे में जब कोई दबंग और सत्ता-संरक्षित व्यक्ति के निर्माण और कानून के उल्लंघन पर सरकार रोक नहीं लगा सकती है तो उसे अन्य निर्माण पर भी रोक लगाने का कोई अधिकार नहीं है।
यह जंगल राज पार्ट-2 के आगाज का ही परिणाम है कि जदयू-राजद की दोस्ती के बाद लालू-नीतीश के संरक्षण में अनन्त सिंह, प्रभुनाथ सिंह, पप्पू यादव, और मो. शहाबुद्दीन जैसे दबंगों और बाहुबलियों के पौ बारह हो गए हैं।
नीतीश कुमार बतायें कि कानून और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर उनके विधायक अनन्त सिंह ने मॉल का उद्घाटन कैसे कर लिया? क्या इससे कोर्ट के आदेश की धज्जियां नहीं उड़ी? क्या यही कानून का राज है?